
देहरादून: उत्तराखंड कांग्रेस में लंबे समय से चल रही गुटबाजी और अंदरूनी खींचतान के बीच पार्टी प्रभारी कुमारी सैलजा का पांच दिवसीय दौरा सियासी तौर पर बेहद अहम माना जा रहा है। करीब ढाई महीने बाद प्रदेश पहुंच रहीं सैलजा आज रुद्रपुर से अपने दौरे की शुरुआत करेंगी और विभिन्न जिलों में संगठनात्मक बैठकों के जरिए पार्टी की स्थिति का जायजा लेंगी।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, सैलजा का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब कांग्रेस के भीतर नेतृत्व को लेकर विवाद खुलकर सामने आ चुका है। कई वरिष्ठ नेता खुद को पार्टी का चेहरा बनाने की कोशिश में हैं, जिससे संगठनात्मक एकजुटता प्रभावित हो रही है। लगातार बयानबाजी और आपसी आरोप-प्रत्यारोप ने कार्यकर्ताओं के बीच भी भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है।
इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए प्रदेश नेतृत्व ने सभी वरिष्ठ नेताओं को सैलजा की बैठकों में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं। दौरे के दौरान रुद्रपुर, हल्द्वानी, कोटद्वार, हरिद्वार और देहरादून में अलग-अलग स्तर पर बैठकें आयोजित की जाएंगी, जिनमें जिला, महानगर और प्रदेश स्तर के पदाधिकारी शामिल होंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह दौरा केवल औपचारिक नहीं बल्कि संगठन को फिर से सक्रिय और संतुलित करने की रणनीति का हिस्सा है। 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए पार्टी अभी से जमीनी स्तर पर मजबूती लाने की कोशिश में है, लेकिन गुटबाजी इस राह में सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।
दूसरी ओर, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत फिलहाल अवकाश पर हैं और उन्होंने बैठकों में शामिल होने को लेकर स्पष्ट रुख नहीं अपनाया है। हालांकि उन्होंने यह जरूर कहा है कि एक कार्यकर्ता के तौर पर वे प्रभारी का स्वागत करने जाएंगे। उनके रुख को लेकर भी पार्टी के भीतर चर्चा बनी हुई है।
कुल मिलाकर, कांग्रेस के लिए सैलजा का यह दौरा संगठनात्मक एकता की परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है। यदि पार्टी इस दौरान अंदरूनी मतभेदों को कम करने में सफल होती है, तो आगामी चुनावों के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया जा सकता है, अन्यथा गुटबाजी पार्टी की चुनावी संभावनाओं को प्रभावित कर सकती है।




