
देहरादून: उत्तराखंड में जनगणना के पहले चरण की तैयारियां तेज हो गई हैं और इसकी शुरुआत इस बार एक नए अंदाज में की जा रही है। जनगणना निदेशालय ने तय किया है कि 10 अप्रैल से शुरू होने वाली स्वगणना प्रक्रिया की शुरुआत राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों से की जाएगी। इसके तहत ये सभी अपने-अपने आवासों से ऑनलाइन माध्यम से स्वयं जनगणना (स्वगणना) करेंगे।
निदेशालय के अनुसार, इस बार जनगणना प्रक्रिया को डिजिटल और अधिक पारदर्शी बनाने पर जोर दिया गया है। इसके लिए एक ऑनलाइन पोर्टल (https://se.census.gov.in) तैयार किया गया है, जहां नागरिक घर बैठे अपनी जानकारी भर सकेंगे। स्वगणना की इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार के दस्तावेज की आवश्यकता नहीं होगी, बल्कि नागरिकों को केवल 33 निर्धारित सवालों के जवाब देने होंगे।
अधिकारियों का कहना है कि स्वगणना से लोगों का समय बचेगा और प्रक्रिया अधिक सुगम होगी। जो लोग स्वयं जानकारी भर देंगे, उनके घर प्रगणक केवल सत्यापन के लिए पहुंचेंगे। वहीं जो लोग ऑनलाइन जानकारी नहीं भर पाएंगे, उनके लिए प्रगणक 25 अप्रैल से घर-घर जाकर विवरण एकत्र करेंगे।
जनगणना के पहले चरण में मकान सूचीकरण और मकान गणना का कार्य भी शामिल है। इस दौरान प्रगणक घरों पर जाकर मकान संख्या अंकित करेंगे और संबंधित सूचनाएं दर्ज करेंगे। हालांकि, स्वगणना करने वाले नागरिकों को मकान नंबर जैसी जानकारी भरने की आवश्यकता नहीं होगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, डिजिटल जनगणना से डेटा संग्रहण की प्रक्रिया अधिक तेज, सटीक और पारदर्शी होगी। साथ ही इससे प्रशासन को भविष्य की योजनाओं और नीतियों के निर्माण में बेहतर मदद मिलेगी।
कुल मिलाकर, उत्तराखंड में जनगणना का यह नया डिजिटल मॉडल न केवल तकनीकी रूप से उन्नत है, बल्कि आम नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है, जिससे अधिक से अधिक लोग इसमें भागीदारी कर सकें।




