
मिर्जापुर। जिले में साइबर ठगी का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां माघ मेले में काम दिलाने और अच्छी मजदूरी का लालच देकर 48 ग्रामीणों के बैंक खाते खुलवाए गए। जांच में 29 खातों में करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेनदेन की आशंका सामने आई है। मामले में चील्ह थाने में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।
ऐसे हुआ फर्जीवाड़ा
क्षेत्र पंचायत सदस्य भारतेंदु यादव ने तहरीर में बताया कि दिसंबर 2025 में एक व्यक्ति ने मलाधरपुर गांव के मजदूरों को माघ मेले में काम दिलाने का भरोसा दिलाया। इसके बाद उसने उनके नाम से सिम कार्ड निकलवाए और यूको बैंक में खाते खुलवाए।
आरोपी ने खातों की पासबुक, एटीएम कार्ड और सिम अपने पास रख लिए और विश्वास दिलाने के लिए ग्रामीणों को फर्जी आधार कार्ड भी दिखाया। अलग-अलग लोगों को उसने अलग नाम बताए।
संदेह तब हुआ जब खुद निकाला सिम
ग्रामीणों को तब शक हुआ जब कुछ युवाओं ने अपने आधार कार्ड से उसी नंबर का दोबारा सिम निकलवाया। जांच में पता चला कि उनके खातों में रुपयों का लेनदेन हो रहा है। कुछ खातों में एक से तीन लाख रुपये तक जमा और निकासी की गई है।
पुलिस और बैंक जांच तेज
पुलिस के अनुसार, जिन खातों में लेनदेन का शक है, उनकी पिछले एक साल की बैंक डिटेल मंगाई जा रही है।
सोमेन वर्मा, डीआईजी, ने बताया कि म्यूल अकाउंट से जुड़े इस मामले की गहन जांच की जा रही है। प्राथमिक जांच में कुछ खातों को छोड़कर अन्य में लेनदेन नहीं मिला है, लेकिन संदेहास्पद खातों की विस्तृत पड़ताल की जाएगी।
पुराने साइबर गैंग से कनेक्शन की जांच
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कहीं यह मामला मिर्जापुर में पहले से सक्रिय साइबर ठगी गैंग से तो नहीं जुड़ा है।
कटरा कोतवाली, शहर कोतवाली और चुनार थाने में पहले भी करोड़ों के लेनदेन से जुड़े साइबर ठगी के केस दर्ज हैं। मिर्जापुर में 20 करोड़ रुपये से अधिक के लेनदेन वाले पुराने मामलों से तार जुड़ने की संभावना को देखते हुए जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है।







