
गदरपुर। महंगाई के दौर में बिजली उपभोक्ताओं की परेशानी और बढ़ गई है। ऊधम सिंह नगर जिले के गदरपुर क्षेत्र में बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं ने ऊर्जा निगम की बिलिंग व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उपभोक्ताओं का आरोप है कि निर्धारित 30 दिन के अंतराल के बजाय केवल 24 से 25 दिन में ही मीटर रीडिंग लेकर बिजली बिल जारी किए जा रहे हैं। इससे लोगों को हर साल 12 की जगह लगभग 13 बार बिजली बिल जमा करना पड़ रहा है।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के कई उपभोक्ताओं का कहना है कि मीटर रीडर तय समय से पहले ही रीडिंग लेने पहुंच जाते हैं। सामान्य प्रक्रिया के तहत एक माह बाद बिल जारी होना चाहिए, लेकिन लगातार कम अवधि में बिल आने से लोगों की जेब पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। शुरुआत में यह अंतर मामूली लगता है, लेकिन पूरे वर्ष में यही कुछ दिनों का अंतर एक अतिरिक्त बिल में बदल जाता है।
उपभोक्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि समय से पहले बिल बनने से यूनिट की गणना प्रभावित हो रही है। कम दिनों में अधिक खपत दर्ज होने के कारण कई उपभोक्ता ऊंची बिजली स्लैब में पहुंच जाते हैं, जिससे प्रति यूनिट दर बढ़ जाती है। उदाहरण के तौर पर यदि कोई उपभोक्ता सामान्य तौर पर कम दर वाली श्रेणी में रहता है, तो कम समय में अधिक यूनिट दर्ज होने से वह महंगी दर वाली श्रेणी में पहुंच जाता है। इससे उपभोक्ताओं को दोहरी आर्थिक मार झेलनी पड़ रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि ऊर्जा निगम की इस व्यवस्था से आम उपभोक्ताओं में असंतोष बढ़ रहा है। उनका मानना है कि बिलिंग प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए और उपभोक्ताओं को स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए कि रीडिंग किस तारीख को ली गई और कितने दिनों की खपत का बिल जारी किया गया है।
जानकारों ने उपभोक्ताओं को सलाह दी है कि वे अपने बिजली बिल में अंकित पिछले और वर्तमान रीडिंग की तारीखों को ध्यान से जांचें। यदि बिल 28 से 30 दिन के बजाय कम अवधि में जारी हो रहा है तो इसकी शिकायत संबंधित उपखंड कार्यालय या उपभोक्ता सेवा केंद्र में की जा सकती है।
ऊर्जा निगम के एसडीओ प्रकाश चंद शाह ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मौजूदा बिलिंग व्यवस्था से उपभोक्ताओं को कोई नुकसान नहीं हो रहा है। उन्होंने बताया कि कई बार तकनीकी कारणों, छुट्टियों या निर्धारित लक्ष्य पूरा करने के चलते रीडिंग समय में अंतर आ जाता है।
हालांकि उपभोक्ताओं का कहना है कि यदि यह प्रक्रिया लगातार जारी है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने ऊर्जा निगम से मांग की है कि बिलिंग व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाया जाए और उपभोक्ताओं को एसएमएस तथा ऑनलाइन माध्यम से रीडिंग और बिलिंग की पूरी जानकारी उपलब्ध कराई जाए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति न बने।





