
देहरादून। उत्तराखंड पुलिस में दरोगाओं की पदोन्नति को लेकर असंतोष लगातार गहराता जा रहा है। इंस्पेक्टर के पदों में वृद्धि न होने के कारण बड़ी संख्या में दरोगा वर्षों से पदोन्नति की प्रतीक्षा में हैं। हालात यह हैं कि उत्तर प्रदेश में जहां वर्ष 2013 बैच तक के दरोगा इंस्पेक्टर पद पर पदोन्नत हो चुके हैं, वहीं उत्तराखंड में 2008 बैच के अधिकांश दरोगाओं को अब तक तीसरा सितारा नहीं मिल सका है।
सूत्रों के अनुसार, उत्तराखंड में वर्ष 2002 बैच के दरोगाओं की पदोन्नति प्रक्रिया भी करीब 23 साल बाद कुछ वर्ष पूर्व जाकर पूरी हो पाई। इसके बाद जैसे ही 2008 बैच का क्रम शुरू हुआ, कुछ दरोगाओं को इंस्पेक्टर पद पर पदोन्नति मिली, लेकिन पदों की सीमित संख्या के चलते यह प्रक्रिया जल्द ही ठहर गई।
वर्तमान स्थिति यह है कि 2008 बैच के केवल 20 प्रतिशत से कुछ अधिक दरोगाओं को ही इंस्पेक्टर पद पर पदोन्नति का अवसर मिल सका है। शेष दरोगा लंबे समय से प्रतीक्षा में हैं। चिंता की बात यह भी है कि इस बैच के कई दरोगा 50 वर्ष की आयु पार कर चुके हैं और यदि पदोन्नति में और देरी होती है, तो उन्हें दो स्टार के साथ ही सेवानिवृत्त होना पड़ सकता है।
इस स्थिति से खासतौर पर वे दरोगा ज्यादा आहत हैं, जिन्होंने वर्षों तक फील्ड में रहकर पुलिस फोर्स के लिए चुनौतीपूर्ण और महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। उनका कहना है कि मेहनत और अनुभव के बावजूद पदोन्नति का अवसर न मिलना मनोबल को प्रभावित कर रहा है।
दरोगाओं की यह पीड़ा अब संगठन के भीतर चर्चा का विषय बन चुकी है। जानकारी के मुताबिक, जल्द ही यह मामला पुलिस मुख्यालय के माध्यम से शासन स्तर तक उठाया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि दरोगा संघ और वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा इंस्पेक्टर पदों की संख्या बढ़ाने और पदोन्नति प्रक्रिया को गति देने की मांग रखी जा सकती है।
यदि समय रहते इस दिशा में ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो इसका सीधा असर न केवल पुलिसकर्मियों के मनोबल पर पड़ेगा, बल्कि पुलिस व्यवस्था की कार्यक्षमता पर भी प्रभाव पड़ सकता है।




