
राज्य में आर्थिक विकास और पर्यावरणीय संतुलन की वास्तविक स्थिति को समझने के उद्देश्य से उत्तराखंड सरकार ने सस्टेनेबल एनवायरमेंट परफॉर्मेंस इंडेक्स (एसईपीआई) तैयार कर लिया है। यह इंडेक्स इस बात का आकलन करेगा कि इकोनॉमी ग्रोथ के साथ-साथ राज्य की इकोलॉजी किस दिशा में जा रही है और विकास की गतिविधियों का पर्यावरण पर कितना प्रभाव पड़ रहा है।
नियोजन विभाग के अंतर्गत कार्यरत सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी एंड गुड गवर्नेंस (सीपीपीजीजी) द्वारा इस इंडेक्स को विकसित किया गया है। सीपीपीजीजी के निदेशक मनोज कुमार पंत ने बताया कि एसईपीआई में आठ प्रमुख सेक्टर शामिल किए गए हैं, जिनमें कृषि, वन, पर्यटन, पेयजल, ऊर्जा, मानव स्वास्थ्य, ग्रामीण-शहरी विकास और आपदा प्रबंधन शामिल हैं। इन सेक्टरों के अंतर्गत कुल 86 इंडीकेटर निर्धारित किए गए हैं, जिनके आधार पर पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि एसईपीआई का उद्देश्य इकोनॉमी और इकोलॉजी के बीच संतुलन को समझना और दोनों की तुलनात्मक स्थिति को स्पष्ट रूप से सामने लाना है। इसके लिए 2016-17 को बेस ईयर माना गया है। इससे पहले वर्ष 2018-19 में इको-सर्विसेज को लेकर इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेस्ट मैनेजमेंट, भोपाल के सहयोग से एक पायलट प्रोजेक्ट तैयार किया गया था, जिसे अब व्यापक स्वरूप में विकसित किया गया है।
फिलहाल एसईपीआई को राज्य स्तर पर तैयार किया गया है, लेकिन भविष्य में इसे जिला स्तर तक विस्तारित करने की योजना है। इससे प्रत्येक जिले में हो रहे पर्यावरणीय और विकास संबंधी बदलावों की जानकारी स्थानीय प्रशासन को समय पर मिल सकेगी और आवश्यक निर्णय लिए जा सकेंगे। अधिकारियों के अनुसार एसईपीआई के अनुमोदन से संबंधित औपचारिक प्रक्रिया चल रही है।
निदेशक मनोज कुमार पंत ने बताया कि इस इंडेक्स के माध्यम से यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि किसी क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों, जल दोहन या अन्य विकास कार्यों का पर्यावरण पर कितना प्रभाव पड़ रहा है। उदाहरण के तौर पर, यदि भूमिगत जल का दोहन अधिक है लेकिन उसकी तुलना में रिचार्ज के प्रयास कम हैं, तो संबंधित विभागों को सुधारात्मक कदम उठाने का संकेत मिलेगा।
इसी प्रकार प्लास्टिक उत्पादन और उपयोग बढ़ने की स्थिति में यदि उसका प्रसंस्करण और निस्तारण नहीं हो रहा है, तो यह पर्यावरण के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। एसईपीआई के जरिए इस तरह की समस्याओं की पहचान कर समय रहते समाधान की दिशा में काम किया जा सकेगा। इसके अलावा पौधारोपण, हरित आवरण और सतत विकास को बढ़ावा देने में भी यह इंडेक्स सहायक सिद्ध होगा।
अधिकारियों का कहना है कि एसईपीआई का मूल उद्देश्य पर्यावरण को सुरक्षित रखते हुए राज्य की आर्थिकी को मजबूत करना है, ताकि विकास और संरक्षण दोनों साथ-साथ आगे बढ़ सकें।




