
देहरादून। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना मुख्यतया सुरंगों से होकर गुजरती है। इसमें 105 किलोमीटर लंबी 16 मुख्य लाइन सुरंग और 98 किलोमीटर लंबाई की 12 बचाव सुरंगों का निर्माण शामिल है। अब तक 94 किलोमीटर लंबाई की नौ मुख्य लाइन सुरंग और 88 किलोमीटर से अधिक लंबाई की आठ बचाव सुरंगों का कार्य पूरा किया जा चुका है। राज्यसभा सदस्य महेंद्र भट्ट के अनुसार उनके द्वारा सदन में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने यह जानकारी दी।
भट्ट के अनुसार उन्होंने ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के लिए सुरंगों के निर्माण कार्य की प्रगति और परियोजना के पूर्ण होने की समय सीमा के बारे में प्रश्न पूछा था। इसके जवाब में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि परियोजना में 90 प्रतिशत से अधिक सुरंग मार्ग का निर्माण पूरा हो गया है। परियोजना की कुल लंबाई 125 किलोमीटर है। निर्माण कार्यों की प्रगति बढ़ाने के लिए विभिन्न सुरंगों में आठ प्रवेश मार्ग चिह्नित किए गए हैं। इनसे सुरंग की खोदाई के लिए अतिरिक्त कार्य क्षेत्र बनाए गए हैं।
राज्यसभा सदस्य भट्ट ने विशेष उल्लेख के तहत सदन में गंगोत्री व यमुनोत्री क्षेत्र में रेल मार्ग की जरूरत की तरफ सरकार ध्यान आकृष्ट कराया। उन्होंने कहा कि यह दोनों क्षेत्र हिमाचल प्रदेश से लगे हैं और यहां सेब समेत बेमौसमी सब्जी की उपज व्यापक पैमाने पर होती है। चकराता जैसा पर्यटन स्थल यहां है तो ये क्षेत्र गंगा, यमुना के उद्गम स्थल से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राज्य में बदरीनाथ व केदारनाथ धाम को जोड़ने के लिए ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना का कार्य प्रगति पर है। इसी क्रम में गंगोत्री के लिए रेल लाइन का सर्वे हो रहा है। यमुनोत्री क्षेत्र की जनता भी लंबे समय से रेल लाइन सर्वे की मांग कर रही है। उन्होंने केंद्र से आग्रह किया कि यमुनोत्री क्षेत्र को रेल सेवा से जोड़ने के लिए कदम उठाए जाएं।
राज्यसभा सदस्य भट्ट के अन्य प्रश्न के उत्तर में केंद्रीय सडक परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि उत्तराखंड में वर्ष 2014 में राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई 2282 किलोमीटर थी, जो अब बढ़कर 3664 किलोमीटर हो गई है। साथ ही यह भी जानकारी दी कि राष्ट्रीय राजमार्ग-58 पर ऋषिकेश के निकट श्यामपुर में सड़क चौड़ीकरण सहित 24 मीटर स्पान बेलीब्रिज का का कार्य पूरा किया जा चुका है।