
नई दिल्ली। साल 2026 भारत के लिए केवल एक नया कैलेंडर वर्ष नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संविधान की गहन परीक्षा का दौर साबित होने जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लंबित कई अहम मामले ऐसे हैं, जिनके फैसले यह तय करेंगे कि नागरिक किस हवा में सांस लेंगे, उनका वोट गिना जाएगा या नहीं, वे कितनी स्वतंत्रता से अपनी बात रख पाएंगे और न्याय की प्रक्रिया कितनी मानवीय होगी।
मतदाता सूची और एसआईआर का मामला
सबसे संवेदनशील मुद्दों में मतदाता सूचियों का विशेष गहन संशोधन (SIR) शामिल है। कई राज्यों में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर याचिकाएं दायर की गई हैं। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि प्रवासी मजदूरों, शहरी गरीबों और बुजुर्गों के नाम बिना पूर्व सूचना के हटाए गए। सुप्रीम कोर्ट का फैसला यह तय करेगा कि मतदाता सूचियों में संशोधन की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी होनी चाहिए और चुनाव से ठीक पहले इसमें कितनी छूट दी जा सकती है। लाखों नागरिकों के लिए सवाल सीधा है—क्या उनका वोट सुरक्षित है?
प्रदूषण और जीवन का अधिकार
दिल्ली और एनसीआर में लगातार बिगड़ते प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि अब केवल आपातकालीन कदमों से काम नहीं चलेगा। अदालत सरकारों से दीर्घकालिक समाधान और जवाबदेही की अपेक्षा कर रही है। कोर्ट ने संकेत दिया है कि प्रदूषण को जीवन के अधिकार से जोड़कर देखा जाएगा और इस पर हर महीने सुनवाई हो सकती है।
महिला सुरक्षा और एसिड अटैक
एसिड अटैक मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा है कि ऐसे अपराधी समाज और शासन दोनों के लिए खतरा हैं। 2026 में इस मुद्दे पर सुनवाई के दौरान अदालत कठोर दिशा-निर्देश तय कर सकती है, जिससे महिला सुरक्षा से जुड़े कानून और अधिक सख्त हो सकते हैं।
धार्मिक प्रथाएं और समानता
तलाक-ए-हसन, निकाह हलाला और बहुविवाह जैसी प्रथाओं को चुनौती देने वाली याचिकाएं भी सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। इन मामलों में एक ओर धार्मिक स्वतंत्रता का तर्क दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर समानता और गरिमा के उल्लंघन का सवाल उठाया गया है। इन पर संविधान पीठ द्वारा सुनवाई 2026 की बड़ी न्यायिक घटनाओं में शामिल होगी।
मुफ्त उपहार और चुनावी नैतिकता
चुनावों में मुफ्त उपहार बांटने को लेकर दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के लिए सहमत हो चुका है। यह फैसला चुनावी राजनीति की दिशा और चुनाव आयोग की भूमिका को नए सिरे से परिभाषित कर सकता है।
उन्नाव केस और जमानत का प्रश्न
उन्नाव बलात्कार मामले में दोषी कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा दी गई जमानत को सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। यह मामला जमानत, सजा निलंबन और पीड़ितों के अधिकारों को लेकर न्यायपालिका के दृष्टिकोण को स्पष्ट करेगा।
कुल मिलाकर, 2026 सुप्रीम कोर्ट के लिए सिर्फ फैसलों का साल नहीं, बल्कि यह तय करने का समय है कि भारतीय लोकतंत्र, न्याय और नागरिक स्वतंत्रताएं किस दिशा में आगे बढ़ेंगी। इन निर्णयों का असर सीधे-सीधे हर नागरिक की रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर पड़ेगा।







