
देहरादून। उत्तराखंड में एक अप्रैल से प्रारंभ होने जा रहे नए तबादला सीजन में इस बार बड़ी संख्या में कर्मचारियों के स्थानांतरण पर शुरुआती दिनों में रोक जैसी स्थिति रहेगी। राज्य में 40 हजार से अधिक कर्मचारी ऐसे हैं, जिनके तबादले फिलहाल नहीं किए जाएंगे। यह निर्णय गृह मंत्रालय के अनुरोध और आगामी प्रशासनिक कार्यों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
दरअसल, प्रदेश में जल्द ही जनगणना की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। जनगणना दो चरणों में संपन्न कराई जाएगी। पहले चरण में 25 अप्रैल से 24 मई तक मकान सूचीकरण का कार्य होगा, जिसके लिए कर्मचारियों का प्रशिक्षण शुरू हो चुका है। इसके अतिरिक्त हिमाच्छादित क्षेत्रों में सितंबर माह में गणना कार्य संपन्न किया जाएगा, जबकि शेष क्षेत्रों में अगले वर्ष फरवरी में मुख्य जनगणना प्रारंभ होगी। इस पूरी प्रक्रिया में लगभग 30 हजार से अधिक कर्मचारी तैनात रहेंगे।
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित स्टेट लेवल इंपावर्ड कमेटी की बैठक में जनगणना निदेशक ईवा आशीष श्रीवास्तव ने गृह मंत्रालय का अनुरोध प्रस्तुत किया, जिसमें स्पष्ट कहा गया है कि जनगणना कार्य में लगे कर्मचारियों के तबादले इस अवधि में न किए जाएं। प्रशासन ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए संबंधित कर्मचारियों के स्थानांतरण पर रोक लगाने का निर्णय लिया है।
इसी के साथ अप्रैल माह में चुनाव आयोग द्वारा विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। इस कार्य में 11,700 बीएलओ सहित 12 हजार से अधिक अधिकारी और कर्मचारी लगाए जाएंगे। एसआईआर की प्रक्रिया लगभग एक माह तक चलेगी। ऐसे में इस कार्य से जुड़े कर्मचारियों के तबादले भी इस अवधि में नहीं किए जाएंगे, ताकि निर्वाचन संबंधी प्रक्रिया प्रभावित न हो।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जनगणना और निर्वाचन से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य बिना किसी व्यवधान के समयबद्ध ढंग से पूरे हों। इसलिए तबादला सीजन की औपचारिक शुरुआत के बावजूद शुरुआती चरण में बड़े पैमाने पर स्थानांतरण की संभावना कम है।
इस निर्णय से एक ओर जहां प्रशासनिक स्थिरता बनी रहेगी, वहीं दूसरी ओर कर्मचारियों को भी कार्यस्थल परिवर्तन की अनिश्चितता से फिलहाल राहत मिलेगी। हालांकि, जनगणना और एसआईआर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद तबादलों की रफ्तार तेज हो सकती है।





