
देहरादून | उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के करनपुर क्षेत्र में रविवार (22 फरवरी) को सकल हिन्दू समाज द्वारा मंगला देवी स्कूल परिसर में एक दिवसीय “विराट हिन्दू सम्मेलन” का भव्य आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में विभिन्न हिंदू संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ स्थानीय नागरिकों ने भी बड़ी संख्या में सहभागिता की। आयोजन स्थल पर सुबह से ही श्रद्धालुओं और प्रतिभागियों का उत्साह देखने को मिला।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ, जिसके बाद सामूहिक रूप से “वंदे मातरम्” का गायन किया गया। मंच से वक्ताओं ने हिन्दू समाज की एकजुटता पर बल देते हुए कहा कि संगठन और समरसता ही समाज की सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने कहा कि यदि हिन्दू समाज संगठित रहेगा तो कोई भी बाहरी शक्ति देश की ओर आंख उठाकर देखने का साहस नहीं कर सकेगी। सम्मेलन का एक प्रमुख आकर्षण बजरंग दल के विकास वर्मा द्वारा प्रस्तुत हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ रहा। उनकी ओजस्वी वाणी में हुए पाठ ने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया और पूरा परिसर भक्तिमय वातावरण में डूब गया।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने भी सम्मेलन की गरिमा को और बढ़ाया। टपकेश्वर महादेव मंदिर से जुड़े श्री टपकेश्वर महादेव डमरू मंडल द्वारा प्रस्तुत शिव नृत्य और ढोल वादन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रस्तुति के दौरान कई लोग स्वयं को थिरकने से नहीं रोक सके। इसके अतिरिक्त बालिकाओं द्वारा प्रस्तुत देशभक्ति से ओतप्रोत नृत्य कार्यक्रम ने भी खूब सराहना बटोरी।

आयोजन की सफलता में संयोजक प्रवीण गुप्ता, सह संयोजक ऋषभ मल्होत्रा और कार्यक्रम अध्यक्ष अरुण सक्सेना की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इनके साथ रवि कुमार, राहुल लारा, आशीष रावत, अंशु चावला, उमानरेश तिवारी और यशपाल दीवान सहित कई कार्यकर्ताओं ने सक्रिय सहयोग दिया।
कार्यक्रम में आचार्य गिरीश चंद्र सेमवाल, पंडित वाचस्पति डिमरी, पंडित राम अचल त्रिपाठी, पंडित विशाल मिश्रा, पंडित ललितमोहन त्रिपाठी, गुलशन कुमार और आलोक चतुर्वेदी सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही। साथ ही मनुज गौतम, तनुज गौतम, अनिल रस्तोगी, प्रमोद शर्मा, नंदू बिष्ट, अनुराग गोयल, जितेंद्र राजौरी, राजीव राजौरी, मनोज पटेल, राजेश बहल और अश्वनी पुंडीर सहित कई स्थानीय नागरिकों ने कार्यक्रम में सहभागिता की।
सम्मेलन की विशेष बात यह रही कि महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई। मातृशक्ति की सक्रिय उपस्थिति और सहयोग से आयोजन और अधिक सशक्त और प्रेरणादायी बना। कुल मिलाकर, करनपुर में आयोजित यह “विराट हिन्दू सम्मेलन” सामाजिक एकजुटता, सांस्कृतिक अभिव्यक्ति और धार्मिक चेतना का संगम बनकर उभरा, जिसने उपस्थित जनसमूह में उत्साह और आत्मविश्वास का संचार किया।




