
बोर्ड परीक्षाएं नजदीक आते ही विद्यार्थियों पर बेहतर प्रदर्शन और अधिक अंक लाने का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी अंकों की होड़ में कई छात्र-छात्राएं अपने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी कर रहे हैं, जिसका सीधा असर उनकी नींद, एकाग्रता और मानसिक संतुलन पर पड़ रहा है। ऊधम सिंह नगर जिले में राजकीय मेडिकल कॉलेज के मन कक्ष में इन दिनों तनाव, चिंता, घबराहट और अनिद्रा की शिकायत लेकर विद्यार्थियों की संख्या बढ़ती जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति परीक्षा के समय आम हो जाती है, लेकिन यदि समय रहते ध्यान न दिया जाए तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
जिले में इस वर्ष उत्तराखंड बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं के लिए कुल 39,924 परीक्षार्थी पंजीकृत हैं। 21 फरवरी से 20 मार्च तक 110 परीक्षा केंद्रों पर परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी। जैसे-जैसे परीक्षा की तारीख नजदीक आ रही है, विद्यार्थियों में घबराहट, नींद की कमी, चिड़चिड़ापन और मानसिक थकान के लक्षण बढ़ते जा रहे हैं। कई विद्यार्थी अंतिम दिनों में जरूरत से ज्यादा पढ़ाई करने की कोशिश करते हैं और देर रात तक जागकर पाठ्यक्रम दोहराते रहते हैं। इसका नतीजा यह होता है कि उनका दिमाग अत्यधिक थक जाता है और पहले से पढ़ा हुआ विषय भी उलझन पैदा करने लगता है।
राजकीय मेडिकल कॉलेज के मनोचिकित्सक डॉ. ईके डल्ला के अनुसार, इस समय रोजाना दो से चार विद्यार्थी नींद न आने और मानसिक तनाव की शिकायत लेकर काउंसलिंग के लिए पहुंच रहे हैं। विद्यार्थियों का कहना है कि जब वे रात में सोने की कोशिश करते हैं तो दिनभर पढ़ा हुआ पाठ्यक्रम दिमाग में घूमता रहता है, जिससे नींद नहीं आती। यह स्थिति धीरे-धीरे चिंता और घबराहट को बढ़ा देती है, जो परीक्षा के प्रदर्शन को भी प्रभावित कर सकती है।
ऐसे ही मामलों में शहर के जगतपुरा निवासी एक हाईस्कूल छात्र, जो पहली बार बोर्ड परीक्षा में शामिल होने जा रहा है, पढ़ाई और परीक्षा के दबाव के चलते अनिद्रा से परेशान हो गया था। समय पर डॉक्टर से सलाह और काउंसलिंग मिलने के बाद उसे काफी राहत मिली। इसी तरह सुभाषनगर निवासी इंटरमीडिएट की एक छात्रा देर रात तक पढ़ाई करती थी, जिससे उसकी नींद पूरी नहीं हो पा रही थी और उसे घबराहट होने लगी थी। काउंसलिंग के बाद अब वह समय-सारिणी बनाकर संतुलित तरीके से परीक्षा की तैयारी कर रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि परीक्षा के समय सबसे जरूरी है नियमित दिनचर्या और पर्याप्त नींद। विद्यार्थियों को रोजाना छह से सात घंटे की नींद जरूर लेनी चाहिए और पढ़ाई को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर करनी चाहिए। हर दो घंटे की पढ़ाई के बाद कुछ मिनट का ब्रेक लेना, गहरी सांस लेना और ध्यान करना मानसिक तनाव को कम करता है। कठिन विषयों को सुबह पढ़ना, नोट्स के माध्यम से दोहराव करना और परिवार व शिक्षकों से बातचीत करते रहना भी आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद करता है। पूरी रात जागकर पढ़ाई करने से बचना, अंतिम दिनों में नया पाठ्यक्रम शुरू न करना, मोबाइल पर समय बर्बाद न करना और खुद की तुलना दूसरों से न करना भी जरूरी बताया गया है। विशेषज्ञों का स्पष्ट संदेश है कि स्वस्थ शरीर और शांत मन के साथ की गई तैयारी ही बेहतर परिणाम दिला सकती है।







