
‘इस वर्ष बीते वर्षों की तुलना में अब तक सर्वाधिक तीर्थ यात्री धामों में दर्शनों को पहुंचे हैं। वर्षाकाल के बाद पितृपक्ष में दर्शनों को पहुंचने वालों की संख्या सबसे अधिक रही। इन दिनों चारधाम यात्रा के लिए सबसे बेहतर मौसम है। यात्रियों को चाहिए कि पर्वतीय क्षेत्रों में कम तापमान को देखते हुए गर्म कपड़ों के साथ यात्रा करें।’
– एके श्रीवास्तव, ओएसडी, यात्रा प्रशासन संगठन
ऋषिकेश। इस बार चारधाम यात्रा को नित नए रिकॉर्ड बना रही है। यात्रा को पांच माह का समय पूरा हो गया है और अभी करीब एक माह की यात्रा शेष है। इस अवधि में 39.82 लाख तीर्थ यात्री हेमकुंड साहिब समेत चारों धाम की यात्रा कर चुके हैं। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में यह आंकड़ा नए कीर्तिमान बनाएगा।
इस वर्ष तीन मई को गंगोत्री-यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ चारधाम यात्रा शुरू हुई थी। छह मई को केदारनाथ और आठ मई को बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा ने इस कदर गति पकड़ी कि धामों में यात्री व्यवस्थाएं लड़खड़ाने लगीं।
ऐसे में प्रशासन को यात्रियों की संख्या नियंत्रित करने के लिए धामों में स्लाट व्यवस्था लागू करनी पड़ी। हालांकि, इससे कई तरह की दिक्कतें भी सामने आईं।
जुलाई मध्य से अगस्त मध्य तक बरसात के चलते यात्रा कुछ धीमी रही, लेकिन इसके बाद यात्रा में फिर से गति पकड़ ली। पितृपक्ष में दस सितंबर से 25 सितंबर के मध्य तो रिकॉर्ड यात्री चारों धाम पहुंचे। वर्तमान में भी दक्षिण भारत समेत महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश व गुजरात से बड़ी संख्या में तीर्थ यात्री दर्शनों को पहुंच रहे हैं।
यात्री संख्या की बात करें तो वर्ष 2013 की आपदा के बाद चारधाम यात्रा पूरी तरह ठप हो गई थी। लेकिन, केदारनाथ में पुनर्निर्माण के बाद वर्ष 2016 से यात्रा बढ़ने लगी और इस वर्ष 14 लाख 17 हजार 157 श्रद्धालु धामों में दर्शनों को पहुंचे।
वर्ष 2019 में सर्वाधिक 34 लाख 16 हजार 442 तीर्थयात्री धामों में पहुंचे, लेकिन वर्ष 2020-21 में कोरोना महामारी के कारण फिर यात्रा पर ब्रेक लग गए। कोरोना महामारी से निताज मिलने के बाद इस वर्ष यात्रा पूरे वैभव पर है और अब तक धामों में 39 लाख 82 हजार 518 यात्री दर्शन कर चुके हैं।