
देहरादून: दिल्ली में ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल का असर अब उत्तराखंड में भी साफ दिखाई देने लगा है। गुरुवार को देहरादून समेत प्रदेशभर के ट्रांसपोर्ट कारोबारियों ने हड़ताल का समर्थन किया, जिसके चलते मालवाहक वाहनों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित रही। हालात ऐसे बन गए कि न तो दिल्ली से उत्तराखंड के लिए ट्रक पहुंचे और न ही उत्तराखंड से दिल्ली के लिए मालवाहक वाहन रवाना हो सके।
ट्रांसपोर्ट व्यवस्था प्रभावित होने से प्रदेश की सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ने लगा है। देहरादून, हरिद्वार और ऋषिकेश के ट्रांसपोर्ट नगरों में दिनभर सन्नाटा पसरा रहा। कई ट्रांसपोर्ट कंपनियों ने अपने वाहन खड़े कर दिए, जबकि माल बुकिंग का काम भी काफी हद तक ठप रहा। कारोबारियों का कहना है कि यदि हड़ताल जल्द समाप्त नहीं हुई तो रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।
सबसे ज्यादा असर उन व्यापारियों पर पड़ रहा है जिनका कारोबार दिल्ली की मंडियों और गोदामों पर निर्भर है। फल-सब्जी, किराना सामान, डेयरी उत्पाद, पैक्ड फूड और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की आपूर्ति में व्यवधान आने लगा है। व्यापारियों ने आशंका जताई है कि यदि अगले एक-दो दिनों तक स्थिति सामान्य नहीं हुई तो बाजार में जरूरी सामान की कमी और कीमतों में उछाल देखने को मिल सकता है।
फल और सब्जी कारोबारियों का कहना है कि दिल्ली की मंडियों से नियमित आपूर्ति बाधित होने पर स्थानीय बाजारों में ताजे उत्पादों की कमी हो सकती है। वहीं, पैक्ड फूड और अन्य उपभोक्ता उत्पादों की सप्लाई भी प्रभावित होने लगी है। इससे आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ने की संभावना बढ़ गई है।
ट्रांसपोर्ट हड़ताल का असर अब औद्योगिक क्षेत्रों में भी महसूस किया जाने लगा है। सेलाकुई, सिडकुल और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में कच्चे माल और तैयार उत्पादों की ढुलाई प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। उद्योगपतियों का कहना है कि यदि परिवहन व्यवस्था जल्द बहाल नहीं हुई तो उत्पादन चक्र प्रभावित हो सकता है और फैक्ट्रियों के संचालन पर भी असर पड़ेगा।
ट्रांसपोर्ट कारोबारियों के अनुसार फिलहाल हड़ताल का असर शुरुआती स्तर पर है, लेकिन स्थिति लंबी खिंचने पर प्रदेश की सप्लाई चेन पूरी तरह प्रभावित हो सकती है। इससे न केवल व्यापार और उद्योग प्रभावित होंगे, बल्कि आम उपभोक्ताओं को भी महंगाई और वस्तुओं की कमी का सामना करना पड़ सकता है।




