
देहरादून: उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता बीसी खंडूड़ी के निधन पर पूरे प्रदेश में शोक की लहर है। मंगलवार सुबह उनके निधन की खबर फैलते ही राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक क्षेत्रों में शोक व्यक्त किया जाने लगा। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने देहरादून पहुंचकर उनके पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित की और उन्हें श्रद्धांजलि दी।
उपराष्ट्रपति सुबह बसंत विहार स्थित खंडूड़ी के आवास पहुंचे, जहां उन्होंने शोक संतप्त परिजनों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की। इस दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित कई मंत्री, जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। उपराष्ट्रपति ने कहा कि बीसी खंडूड़ी का देश के विकास और सार्वजनिक जीवन में योगदान हमेशा याद रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि देश ने एक विशिष्ट सैनिक, सक्षम प्रशासक और उच्च नैतिक मूल्यों वाले नेता को खो दिया है।
जानकारी के अनुसार केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के भी हरिद्वार स्थित खड़खड़ी पहुंचने की सूचना है, जहां राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार की तैयारियां की जा रही हैं। भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं में भी गहरा शोक व्याप्त है।
बताया गया कि बीसी खंडूड़ी पिछले 49 दिनों से देहरादून के एक निजी अस्पताल में भर्ती थे। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार उन्हें एक अप्रैल को भर्ती कराया गया था। जांच में उनकी आंतों में रक्तस्राव की समस्या सामने आई थी और विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार चल रहा था। मंगलवार सुबह करीब 11:10 बजे उन्हें हल्का कार्डियक अरेस्ट आया, जिसके बाद उनका निधन हो गया। वह 91 वर्ष के थे।
खंडूड़ी लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे और बीच-बीच में उपचार के लिए अस्पताल आते-जाते रहे थे। हालांकि अप्रैल में भर्ती होने के बाद उनकी हालत में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। उनके निधन की खबर मिलते ही प्रदेशभर से राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और आम लोगों ने श्रद्धांजलि अर्पित की।
राज्य सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री के निधन पर तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया है। इसी क्रम में प्रदेश के शासकीय, अशासकीय और निजी स्कूलों तथा कई सरकारी कार्यालयों को बंद रखने के आदेश जारी किए गए हैं। माध्यमिक शिक्षा निदेशक मुकुल कुमार सती की ओर से इस संबंध में आदेश जारी किया गया।
बीसी खंडूड़ी को उत्तराखंड में सुशासन, ईमानदार राजनीति और विकासोन्मुख नेतृत्व के लिए जाना जाता था। सड़क अवसंरचना, लोकायुक्त कानून और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर उनके फैसले आज भी चर्चा में रहते हैं।





