नई दिल्ली- तेल और गैस की कीमतों में वृद्धि के पश्चात अब देशभर में दवाओं की कीमते भी बढ़ने जा रही है। सरकार ने दवाइयों की कीमत करीब 0.65 फीसदी बढ़ाने की मंजूरी दे दी है। दवाओं की कीमत wholesale Price Index के आधार पर बढ़ाने की अनुमति दी गई है। ये आदेश नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी की ओर से जारी किया गया है।

दवा कंपनियां अब तय फॉर्मूले के आधार पर कीमत बढ़ा सकती है और इसके लिए उन्हें सरकार से अलग से अनुमति लेने की जरूरत नहीं होगी। यानी कुछ जरूरी दवाएं महंगी होंगी। क्योंकि, कंपनियों को सालाना महंगाई के हिसाब से कीमत बढ़ाने की छूट मिल गई है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस बढ़ोतरी के बाद कई दवाओं के दाम बढ़ेंगे। इनमें दर्द निवारक दवाएं जैसे पैरासिटामॉल शामिल है। बुखार और सिरदर्द में इस्तेमाल होने वाली दवा के दाम बढ़ेंगे। इसके अलावा एंटीबायोटिक दवाएं जैसे एजिथ्रोमाइसिन और सिप्रोफ्लॉक्सासिन भी महंगी होंगी। एनीमिया की दवाएं, विटामिन और मिनरल्स की दवाएं और स्टेरॉयड्स की कीमत भी बढ़ेगी। ये सभी दवाएं आम आदमी के रोजमर्रा के इलाज में इस्तेमाल होती हैं। रिपोर्ट के मुताबिक कुछ दवाओं के दाम में ज्यादा बढ़ोतरी भी देखी जा सकती है।
दवा कंपनियों का कहना है कि कच्चे माल की कीमतों में काफी बढ़ोतरी हुई है। अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध के कारण एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रीडिएंट्स और सॉल्वेंट्स की कीमतें 30-35 फीसदी तक बढ़ गई है। ग्लिसरीन की कीमत तो 64 फीसदी बढ़ गई है। इसके अलावा पैकेजिंग मटेरियल जैसे पॉलीविनाइल क्लोराइड और एल्युमिनियम फॉइल भी 40 फीसदी महंगे हो गए हैं। जिसके कारण दवाओं के दाम बढ़ाने के आदेश दिए गए हैं।




