
देहरादून। उत्तराखंड में संचालित चार लाख से अधिक कॉमर्शियल यात्री वाहनों के सामने नई परेशानी खड़ी हो गई है। गढ़वाल और कुमाऊं संभाग में अब तक चल रहे मैनुअल फिटनेस सेंटरों को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया गया है। इस फैसले से पर्वतीय जिलों के वाहन स्वामियों और चालकों को फिटनेस जांच के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी।
गढ़वाल संभाग में अब टिहरी, चमोली और उत्तरकाशी जिलों के सभी कॉमर्शियल वाहन अपनी फिटनेस जांच के लिए देहरादून जिले के एटीएस (ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन) जाएंगे। वहीं पौड़ी और कोटद्वार क्षेत्र के वाहनों को फिटनेस के लिए हरिद्वार जिले के एटीएस सेंटर में जाना होगा। यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है।
यात्रियों की सुरक्षा को बताया गया कारण
परिवहन विभाग का कहना है कि मैनुअल फिटनेस प्रणाली में तकनीकी जांच की सीमाएं थीं। यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए अब वाहनों का फिटनेस परीक्षण केवल अत्याधुनिक मशीनों से ही किया जाएगा। इसी कारण मैनुअल फिटनेस पर रोक लगाई गई है।
एटीएस सेंटरों का ढांचा तैयार, मशीनों का इंतजार
हालांकि विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि पौड़ी, चमोली और टिहरी जिलों में एटीएस सेंटरों का ढांचा तैयार किया जा रहा है। लेकिन जब तक वहां तकनीकी जांच मशीनें स्थापित नहीं हो जातीं, तब तक वाहन चालकों को देहरादून और हरिद्वार जाना ही होगा।
गढ़वाल संभाग में देहरादून जिले के सेलाकुई स्थित लांघा और डोईवाला के लालतप्पड़ में एटीएस सेंटर संचालित हैं। वहीं हरिद्वार जिले के बहादराबाद और रुड़की में भी एटीएस सेंटर स्थापित किए गए हैं।
चार लाख से अधिक कॉमर्शियल वाहन प्रभावित
परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में 4 लाख 17 हजार 94 कॉमर्शियल यात्री वाहन पंजीकृत हैं। इनमें गढ़वाल संभाग में ही लगभग ढाई लाख टैक्सी, मैक्सी और बसें संचालित हो रही हैं। नई व्यवस्था से इन वाहनों की फिटनेस प्रक्रिया महंगी और समयसाध्य हो गई है।
आरटीओ प्रशासन संदीप सैनी ने बताया कि जब तक प्रदेश के सभी जिलों में एटीएस सेंटर पूरी तरह संचालित नहीं हो जाते, तब तक यह वैकल्पिक व्यवस्था जारी रहेगी। विभाग का दावा है कि भविष्य में इससे फिटनेस प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुरक्षित होगी, हालांकि फिलहाल वाहन चालकों को असुविधा झेलनी पड़ेगी।




