
ऊधम सिंह नगर: बाजपुर में भाजपा विधायक अरविंद पांडेय के बेटे अतुल पांडेय से जुड़े चर्चित जमीन विवाद मामले में जांच प्रक्रिया एक बार फिर आगे बढ़ी। शुक्रवार को गठित जांच कमेटी ने मामले की सुनवाई की, जिसमें अतुल पांडेय स्वयं कमेटी के समक्ष उपस्थित हुए। वहीं दूसरे पक्षकार गुरविंदर सिंह की ओर से उनके अधिवक्ता ने जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा।
एसडीएम कार्यालय में हुई सुनवाई के दौरान दूसरे पक्ष के वकील ने कमेटी को बताया कि गुरविंदर सिंह फिलहाल श्री हेमकुंड साहिब गए हुए हैं और वापस लौटने के बाद ही अपना पक्ष रख पाएंगे। इसके बाद जांच कमेटी ने अगली सुनवाई की तिथि बाद में घोषित करने की बात कही।
यह मामला बाजपुर क्षेत्र की जनजातीय भूमि से जुड़ा हुआ है, जिसने पिछले कुछ समय से राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में काफी चर्चा बटोरी है। आरोप है कि विधायक अरविंद पांडेय के बेटे अतुल पांडेय ने गांव सैमलपुरी निवासी जनजाति समाज के एक व्यक्ति की तीन एकड़ से अधिक जमीन कथित रूप से कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर अपने नाम दर्ज कराई। बाद में यह जमीन गुरविंदर सिंह को बेचे जाने और फिर अन्य लोगों तक पहुंचने की बात भी सामने आई।
शिकायत मिलने पर मंडलायुक्त स्तर पर मामले की जांच हुई थी। जांच के बाद भूमि से संबंधित आदेश जनजाति समाज के पक्ष में दिया गया। इसके बाद मामला और अधिक चर्चा में आया। बताया गया कि विधायक अरविंद पांडेय ने तहसील में मंडलायुक्त के आदेश को राजस्व अभिलेखों में दर्ज कराया, लेकिन बाद में उसे हटाए जाने का मामला भी सामने आया। इसी को संदिग्ध मानते हुए संबंधित रजिस्टार कानूनगो को उत्तरकाशी अटैच कर दिया गया था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने एडीएम की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित की है। पिछले सप्ताह भी इस प्रकरण में सुनवाई हुई थी, जिसमें दोनों पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया था। शुक्रवार को हुई सुनवाई में अतुल पांडेय ने कथित तौर पर इस विवाद से जुड़े अधिकारियों को भी जांच में शामिल करने की मांग उठाई।
अतुल पांडेय का कहना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए उनके पिता और परिवार की छवि खराब करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने इसे राजनीतिक साजिश करार देते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की। दूसरी ओर शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जनजातीय भूमि से जुड़े इस मामले में पूरी पारदर्शिता के साथ कार्रवाई होनी चाहिए।
अब सभी की नजरें जांच कमेटी की अगली सुनवाई और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि दोनों पक्षों के विस्तृत जवाब और दस्तावेजों के आधार पर आगे की दिशा तय होगी।




