
देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में चर्चित डॉक्टर आत्महत्या मामले की जांच अब एक अहम मोड़ पर पहुंच गई है। श्री गुरु राम राय मेडिकल कॉलेज की पीजी छात्रा और नेत्र रोग विभाग की चिकित्सक डॉ. तन्वी (25) की मौत के मामले में पुलिस की जांच का केंद्र अब उनका मोबाइल फोन बन गया है।
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि मृतका का फोन इस पूरे मामले की गुत्थी सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसमें मौजूद कॉल डिटेल, चैट और अन्य डिजिटल साक्ष्य से यह स्पष्ट हो सकता है कि आत्महत्या से पहले वह किन परिस्थितियों से गुजर रही थीं। इसी को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने परिजनों को फोन से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ न करने की सख्त हिदायत दी है।
मामले में मृतका के परिजनों ने विभाग की एचओडी डॉ. प्रियंका गुप्ता पर मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं। इसके आधार पर पटेल नगर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, पोस्टमार्टम के बाद परिजन बिना पुलिस को सूचित किए शव लेकर अंबाला के लिए रवाना हो गए थे, जिससे जांच के दौरान मोबाइल फोन तुरंत कब्जे में नहीं लिया जा सका। बाद में पुलिस ने परिजनों से संपर्क कर फोन जल्द देहरादून भेजने का अनुरोध किया है।
मृतका के पिता का दावा है कि आत्महत्या से पहले उनकी बेटी ने उनसे लगभग एक घंटे तक बातचीत की थी, जिसमें उसने मानसिक तनाव और परेशानियों का जिक्र किया था। इसके अलावा, उसने अपनी मां को व्हाट्सएप पर संदेश भेजकर देर से घर पहुंचने की जानकारी दी थी।
पुलिस को आशंका है कि फोन में मौजूद डिजिटल डेटा—जैसे कॉल रिकॉर्ड, मैसेज और संभवतः वीडियो—घटना के कारणों पर से पर्दा उठा सकते हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि आत्महत्या से पहले मृतका ने किसी अन्य व्यक्ति से संपर्क किया था या नहीं।
फिलहाल पुलिस इस मामले में सभी पहलुओं की गहनता से जांच कर रही है। परिजनों द्वारा हरिद्वार आने के दौरान मोबाइल फोन सौंपे जाने की संभावना है, जिसके बाद जांच और तेज होने की उम्मीद है।





