
देहरादून: उत्तराखंड में ग्रामीण श्रमिकों के लिए रोजगार और मजदूरी दोनों के स्तर पर बड़ी राहत देने वाली विकसित भारत ग्रामीण रोजगार गारंटी (वीबी-जी राम जी) योजना लागू हो गई है। एक जुलाई से प्रभावी इस नई योजना के तहत प्रदेश के लाखों श्रमिकों को पहले की तुलना में अधिक मजदूरी और अधिक दिनों तक रोजगार मिलेगा। केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा के स्थान पर लागू की गई इस योजना को राज्य सरकार ने भी प्रदेशभर में लागू कर दिया है।
नई व्यवस्था के तहत अब श्रमिकों को प्रतिदिन 300 रुपये मजदूरी मिलेगी। पहले मनरेगा के अंतर्गत यह राशि 252 रुपये प्रतिदिन थी। यानी नई योजना के लागू होने से श्रमिकों की दैनिक मजदूरी में 48 रुपये की वृद्धि हुई है। इसके साथ ही रोजगार की गारंटी भी 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन प्रतिवर्ष कर दी गई है, जिससे ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि होने की उम्मीद है।
सरकार का कहना है कि नई योजना का उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ विकास कार्यों को गति देना भी है। योजना के तहत ग्रामीण आधारभूत ढांचे के विकास, जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, आपदा राहत कार्यों और ग्रामीण आजीविका से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी।
वीबी-जी राम जी योजना में कुल 318 प्रकार के कार्य शामिल किए गए हैं। इनमें 97 प्रकार के मरम्मत एवं रखरखाव कार्य, 88 ग्रामीण आधारभूत ढांचा विकास कार्य, 107 जल संरक्षण संबंधी कार्य, 86 ग्रामीण आजीविका से जुड़े कार्य तथा 37 प्रकार के आपदा राहत कार्य शामिल हैं। इन कार्यों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन के साथ विकास गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
प्रदेश में पूर्ववर्ती मनरेगा योजना के तहत लगभग 10 लाख जॉब कार्ड जारी किए गए थे। इनमें से वर्तमान में 6.73 लाख जॉब कार्ड धारक सक्रिय हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में दिसंबर तक 4.42 लाख श्रमिकों ने रोजगार की मांग की थी, जिनमें से 3.52 लाख श्रमिकों को काम उपलब्ध कराया गया। नई योजना लागू होने के बाद रोजगार के अवसर और बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मजदूरी में वृद्धि और रोजगार अवधि बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। साथ ही जल संरक्षण, आपदा प्रबंधन और ग्रामीण आधारभूत संरचना से जुड़े कार्यों पर अधिक जोर दिए जाने से गांवों में दीर्घकालिक विकास को भी गति मिलेगी। सरकार का दावा है कि नई योजना से रोजगार के साथ-साथ टिकाऊ परिसंपत्तियों का निर्माण भी सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के नए अवसर विकसित होंगे।




