
देहरादून। विश्व धरोहर स्थल के रूप में प्रसिद्ध नंदादेवी नेशनल पार्क में चल रहे जैव विविधता निगरानी अभियान ने वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण संकेत दिए हैं। सात जून से शुरू हुआ यह विशेष अभियान अब अपने अंतिम पड़ाव सरसो पताल तक पहुंच चुका है। अभियान के दौरान निगरानी दल को हिमालयन थार, साइबेरियन विजल, काला भालू, भरल और पिका जैसे दुर्लभ वन्यजीव प्रत्यक्ष रूप से दिखाई दिए हैं, जबकि हिम तेंदुए और रेड फॉक्स सहित कई अन्य वन्यजीवों की उपस्थिति के प्रमाण भी मिले हैं।
वन विभाग के अनुसार नंदादेवी नेशनल पार्क में प्रत्येक दस वर्ष के अंतराल पर व्यापक जैव विविधता निगरानी अभियान संचालित किया जाता है। इसका उद्देश्य क्षेत्र में मौजूद वन्यजीवों, पक्षियों और वनस्पतियों की वर्तमान स्थिति का आकलन करना तथा संरक्षण रणनीतियों को और प्रभावी बनाना है। इस बार के अभियान में विशेषज्ञों और वनकर्मियों की टीम ने कठिन पर्वतीय क्षेत्रों में पहुंचकर वन्यजीवों की गतिविधियों का सूक्ष्म अध्ययन किया है।
अभियान के दौरान टीम को छह प्रमुख वन्यजीव प्रत्यक्ष रूप से दिखाई दिए। इनमें हिमालयन थार, साइबेरियन विजल, काला भालू, भरल और पिका शामिल हैं। इन वन्यजीवों का प्रत्यक्ष अवलोकन इस बात का संकेत है कि पार्क का प्राकृतिक आवास अभी भी इन प्रजातियों के लिए अनुकूल बना हुआ है। विशेष रूप से हिमालयन थार और काला भालू जैसे वन्यजीवों की उपस्थिति संरक्षण प्रयासों की सफलता को दर्शाती है।
नंदादेवी राष्ट्रीय उद्यान के प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) अभिमन्यु के अनुसार अभियान के दौरान टीम को हिम तेंदुए, रेड फॉक्स और अन्य कई स्तनधारी जीवों के स्कैट (मल) भी मिले हैं। इन जैविक नमूनों के अध्ययन से यह पता चलता है कि संबंधित वन्यजीव इन क्षेत्रों में सक्रिय रूप से मौजूद हैं। वैज्ञानिक विश्लेषण के माध्यम से इन वन्यजीवों की संख्या, गतिविधियों और आवास संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त की जा सकेंगी।
अभियान की एक बड़ी उपलब्धि विभिन्न संवेदनशील स्थलों पर लगाए गए 40 कैमरा ट्रैप भी हैं। ये कैमरे चौबीसों घंटे वन्यजीवों की गतिविधियों को रिकॉर्ड करेंगे। अधिकारियों का मानना है कि कैमरा ट्रैप से प्राप्त होने वाली तस्वीरें और वीडियो कई ऐसे रहस्यों से पर्दा उठा सकते हैं, जिनकी जानकारी प्रत्यक्ष सर्वेक्षण के दौरान नहीं मिल पाती। विशेष रूप से हिम तेंदुए, रेड फॉक्स और अन्य दुर्लभ जीवों की गतिविधियों के प्रमाण इन कैमरों में दर्ज होने की संभावना है।
वन विभाग की टीम वर्तमान में सरसो पताल क्षेत्र में दो दिन तक अध्ययन कार्य पूरा करेगी। इसके बाद वापसी के दौरान सभी कैमरा ट्रैप निकाले जाएंगे और उनसे प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण किया जाएगा। इसके साथ ही टीम क्षेत्र की वनस्पतियों, पारिस्थितिकी तंत्र और पर्यावरणीय बदलावों का भी अध्ययन कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस अभियान से प्राप्त आंकड़े न केवल नंदादेवी नेशनल पार्क की जैव विविधता को समझने में मदद करेंगे, बल्कि भविष्य की संरक्षण योजनाओं के लिए भी आधार तैयार करेंगे। रिपोर्ट तैयार होने के बाद वन्यजीवों की वास्तविक स्थिति, उनके आवास और संरक्षण की जरूरतों को लेकर कई नई जानकारियां सामने आने की उम्मीद है। नंदादेवी की दुर्गम वादियों में चल रहा यह अभियान हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।




