
देहरादून। उत्तराखंड सरकार पूर्व अग्निवीरों के रोजगार और पुनर्रोजगार के लिए विशेष सेल गठित करने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वतंत्रता दिवस पर इस सेल के गठन को औपचारिक मंजूरी दे सकते हैं। पहले बैच के करीब 1200 अग्निवीर दिसंबर-जनवरी में सेवा पूरी करेंगे, जिनके रोजगार के लिए योग्यता, अनुभव और रुचि के आधार पर रोजगार, व्यावसायिक शिक्षा और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की योजना है।
विस्तृत समाचार
देहरादून। उत्तराखंड में सेवा पूरी करने वाले पूर्व अग्निवीरों के पुनर्रोजगार के लिए सरकार विशेष पहल करने जा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पूर्व अग्निवीर पुनर्रोजगार सेल के गठन को औपचारिक मंजूरी दे सकते हैं। मंजूरी के बाद यह सेल पूर्व अग्निवीरों को उनकी योग्यता, अनुभव और रुचि के अनुरूप रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में काम शुरू करेगा।
उत्तराखंड सरकार का यह मॉडल देश में अपनी तरह की पहली पहल बताया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य अग्निवीर योजना के तहत चार वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद बाहर आने वाले युवाओं के कौशल और सैन्य अनुभव का बेहतर उपयोग करते हुए उन्हें रोजगार तथा स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।
मुख्यमंत्री के अधीन होगा पुनर्रोजगार सेल
अग्निवीरों के भविष्य से जुड़े इस विषय की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पुनर्रोजगार सेल को अपने अधीन रखने का निर्णय लिया है। सूत्रों के अनुसार सेल के गठन और उसके प्रारूप को लेकर अंतिम सहमति बन चुकी है।
मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से सेल के गठन से संबंधित सभी औपचारिकताओं को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। स्वतंत्रता दिवस पर इसकी औपचारिक घोषणा और शुरुआत किए जाने की संभावना है।
सेवानिवृत्त कर्नल और विशेषज्ञ होंगे टीम में
पूर्व अग्निवीर पुनर्रोजगार सेल में मुख्यमंत्री के अलावा एक सेवानिवृत्त कर्नल, राज्य सरकार के अधिकारी और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल होंगे। यह टीम पूर्व अग्निवीरों की शैक्षिक योग्यता, सैन्य अनुभव, रुचि और कौशल का आकलन कर उनके लिए रोजगार के उपयुक्त विकल्प तलाशेगी।
सरकार की कोशिश है कि सेना में सेवा के दौरान हासिल किए गए अनुशासन, तकनीकी दक्षता और अन्य कौशल का उपयोग उन्हें आगे के करियर में बेहतर अवसर दिलाने के लिए किया जाए।
निजी कंपनियों में रोजगार और व्यावसायिक शिक्षा पर जोर
जो पूर्व अग्निवीर उच्च शिक्षा या व्यावसायिक प्रशिक्षण के माध्यम से बहुराष्ट्रीय कंपनियों और निजी क्षेत्र में नौकरी करना चाहते हैं, उनके लिए आवश्यक व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण के अवसर उपलब्ध कराने की योजना है।
सरकार उनके कौशल के अनुसार रोजगार के अवसर तलाशने के साथ-साथ निजी क्षेत्र की कंपनियों से समन्वय भी कर सकती है, ताकि पूर्व अग्निवीरों को उनकी क्षमता के अनुरूप रोजगार मिल सके।
स्वरोजगार के लिए भी मिलेगी मदद
सरकार केवल नौकरी तक सीमित नहीं रहना चाहती। जो पूर्व अग्निवीर अपना कारोबार या निजी उद्यम शुरू करना चाहते हैं, उन्हें आर्थिक और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने की योजना भी तैयार की गई है।
ऐसे युवाओं को स्वरोजगार से जुड़ी सरकारी योजनाओं, प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और तकनीकी मार्गदर्शन से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। इससे पूर्व अग्निवीर अपने सैन्य अनुभव और कौशल का इस्तेमाल उद्यमिता के क्षेत्र में भी कर सकेंगे।
दिसंबर-जनवरी में करीब 1200 अग्निवीर होंगे रिटायर
उत्तराखंड में अग्निवीरों के पहले बैच के करीब 1200 जवान दिसंबर-जनवरी में अपनी चार साल की सेवा पूरी कर रिटायर होंगे। सरकार ने इन्हीं युवाओं को ध्यान में रखते हुए पुनर्रोजगार की योजना को प्राथमिकता दी है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इससे पहले 17 जुलाई को पूर्व अग्निवीरों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए विशेष सेल गठित करने की घोषणा की थी। अब करीब एक महीने के भीतर इस घोषणा को अमलीजामा पहनाने की तैयारी है।
सैनिक कल्याण बोर्ड के अनुभव का भी होगा उपयोग
उत्तराखंड में पहले से सैनिक कल्याण बोर्ड कार्यरत है, जो सेना से सेवानिवृत्त होने वाले जवानों और उनके आश्रितों के कल्याण तथा रोजगार से जुड़े मामलों में काम करता है। पूर्व अग्निवीरों के पुनर्रोजगार में सरकार इस बोर्ड के अनुभव और मौजूदा तंत्र का लाभ लेने की तैयारी में है।
सरकार का मानना है कि पूर्व अग्निवीरों के पास सैन्य प्रशिक्षण और अनुशासन के साथ विभिन्न क्षेत्रों का अनुभव होगा। ऐसे में उन्हें सही दिशा और अवसर उपलब्ध कराकर निजी क्षेत्र, सरकारी योजनाओं और स्वरोजगार से जोड़ा जा सकता है।
स्वतंत्रता दिवस पर मिल सकती है औपचारिक मंजूरी
पूर्व अग्निवीर पुनर्रोजगार सेल के गठन की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा रहा है। ऐसे में स्वतंत्रता दिवस पर मुख्यमंत्री धामी की ओर से इसकी औपचारिक स्वीकृति दिए जाने की संभावना है। इसके साथ ही उत्तराखंड पूर्व अग्निवीरों के पुनर्रोजगार के लिए विशेष मॉडल लागू करने वाला देश का पहला राज्य बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
सरकार की यह पहल उन युवाओं के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जो अग्निवीर के रूप में देश की सेवा पूरी करने के बाद अपने भविष्य के लिए नए रोजगार और करियर विकल्प तलाशेंगे।





