डा० अंसारी, डॉ० अनिल वर्मा, कल्पना बिष्ट, मोहन खत्री, योगेश अग्रवाल व विकास कुमार सम्मानित
देहरादून : स्वास्थ्य विभाग उत्तराखंड, उत्तराखंड एड्स नियंत्रण समिति, राज्य रक्त संचरण परिषद्, तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा विश्व रक्तदाता दिवस, इस वर्ष 2026 की थीम “मानवता की एक बूँद। रक्तदान करें। जीवन बचाएं.” को लेकर दून मेडिकल कॉलेज,पटेल नगर, देहरादून के सभागार में गोष्ठी एवं रक्तदान शिविर का आयोजन तथा रक्तदाता संस्थाओं को सम्मानित करके मनाया गया।
इस अवसर पर रक्तदान के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए रेडक्रॉस सोसाइटी की टीम में अध्यक्ष डॉ. एम एस अंसारी, सचिव कल्पना बिष्ट,डॉ. अनिल वर्मा, श्री मोहन खत्री, श्री योगेश अग्रवाल तथा श्री विकास कुमार को सम्मानित किया गया। साथ ही दून मेडिकल कालेज ब्लड बैंक की अधिकारी एसो. प्रोफेसर डॉ. सना उमर, डा. श्रुति , काउंसलर अनिता सकलानी, टेक्निकल सुपरवाइजर आशीष खाली, टेक्नीशियन गणेश गोदियाल , वीरा फाउंडेशन के सी ई ओ विनोद डोभाल, संत निरंकारी मिशन के उत्तराखंड प्रभारी हरभजन सिंह जी, उत्तरांचल यूनिवर्सिटी के प्राचार्य डा राजेश बहुगुणा सहित, स्टेट कॉलेज ऑफ़ नर्सिंग, शिव सेना, एन सी सी, एन एस एस, आदि 21 संस्थाओं को सम्मानित किया।
मेडिकल एजुकेशन के निदेशक डॉ. प्रोफेसर अजय आर्य ने कहा कि रक्तदान करना मानवता की पहचान है। जब एक मरीज का जीवन केवल दूसरे व्यक्ति से मिले रक्त पर ही निर्भर हो जाता है तो रक्तदाता के रक्त की एक – एक बूँद जीवन बचाने वाली मानवता की बूंदों के रूप में महसूस होती है। उस समय रक्तदाता दूसरों का दुःख दर्द दूर करने वाला मानवता की रक्षा करने वाला दूत बन कर सामने आता है।
दून मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. गीता जैन ने कहा कि रक्तदान जरूरतमंद व्यक्ति को जीवन का उपहार देना है। रक्त की कमी के कारण जिंदगी और मौत से जूझ रहे व्यक्ति के लिए किया गया रक्तदान जीवनदान बन जाता है।अतः हर नागरिक का यह नैतिक दायित्व है कि वह स्वेच्छा से आगे आकर रक्तदान करे और जीवन बचाये।

सीएमएस डॉ. आर एस बिष्ट ने उत्तराखंड में रक्तदान की प्रगति को सराहनीय बताते हुए रक्तदाताओं, संस्थाओं एवं दून ब्लड बैंक की समस्त टीम का आभार व्यक्त किया।
155 बार रक्तदान कर चुके यूथ रेडक्रॉस सोसाइटी के रक्तदाता शिरोमणि डॉ. अनिल वर्मा ने रक्तदान प्रक्रिया के जनक नोबल पुरस्कार विजेता डॉ. कार्ल लैंडस्टीनर की जयंती पर अपनी श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें मानवता की रक्षा करने वाला महान चिकित्सा वैज्ञानिक बताया। उन्होंने बताया कि सन 1900-01 में डॉ. कार्ल लैंडस्टीनर द्वारा “ए बी ओ” रक्त वर्गों की महान खोज के फलस्वरूप 126 वर्षों में विश्व में अब तक करोड़ों ऐसे लोग जिन्दा हैं और प्रतिदिन करोड़ों लोगों को जीवनदान मिलता है।
डॉ.वर्मा ने आनुवांशिक गंभीर रक्तरोग थैलासीमिया के प्रति आम जनता को जागरूक करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि शादी से पूर्व लड़का – लड़की थैलासीमिया टेस्ट जरूर करवाएं। यानि दोनों आपस में जन्मकुंडली मिलाएं ना मिलाएं परन्तु रक्त कुंडली का मिलान अवश्य करें। दो थैलासेमिया माइनर आपस में विवाह ना करें और करना ही पड़े तो डॉक्टर से सलाह लेकर संतान पैदा करें।उन्होंने सुझाव दिया कि परिवार आगे बढ़ाने के लिए कोई अनाथ स्वस्थ बच्चा गोद ले सकते हैं। इससे जहाँ उनकी संतान की इच्छा पूर्ति होगी वहीं एक अनाथ बच्चे को माता – पिता मिल जाएंगे।एनीमिया पर बोलते हुए डॉ. वर्मा ने युवाओं का आह्वान किया कि “फ़ास्ट फ़ूड और नशे से नाता तोडें, रक्तदान से नाता जोडें।”

रक्तदाता प्रेरक डॉ० वर्मा ने रक्तदान करने के प्रति अंधविश्वासों को दूर करते हुए स्वयं रक्तदाता को होने वाले फायदों की जानकारी देते हुए बताया कि नियमित रक्तदान करने से 90 प्रतिशत कैंसर व 85 प्रतिशत हार्ट अटैक होने की संभावना नहीं होती।अच्छा कोलेस्ट्रॉल एचडीएल बढ़ता है व खराब कोलेस्ट्रॉल एलडीएल घटता है। एक बार रक्तदान करने से 600 कैलोरी फैट बर्न होने से मोटापा नहीं आता। ब्लड प्रेशर व ब्लड शुगर नियंत्रित रखने में सहायता मिलती है। नये ब्लड सेल्स बनने से शरीर में नई ऊर्जा , उत्साह व स्फूर्ति का संचार होता है। रक्तदान अनेक हो सकने वाली बीमारियों से बचाते हुए एंटी एजिंग का काम करता है।उन्होंने रेडक्रॉस सोसायटी को सम्मानित करने के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम का अति कुशल संचालन एसो. प्रोफेसर डॉ. सना उमर तथा डॉ. श्रुति ने किया l




