
उत्तरकाशी: चारधाम यात्रा शुरू होने में अब बेहद कम समय शेष है, लेकिन चिन्यालीसौड़ से गंगोत्री धाम तक जाने वाले गंगोत्री हाईवे की स्थिति अब भी चिंताजनक बनी हुई है। पिछले वर्ष आई आपदा के बाद सड़क सुधार के नाम पर केवल मलबा हटाने का काम किया गया, जबकि स्थायी सुरक्षा उपाय अब तक नहीं किए जा सके हैं।
करीब 135 किलोमीटर लंबे इस महत्वपूर्ण मार्ग पर कई स्थानों पर सड़कें अभी भी क्षतिग्रस्त हैं। जनपद की सीमा में प्रवेश करते ही नगुण भूस्खलन जोन यात्रियों के लिए पहली बड़ी चुनौती बनकर सामने आता है। इसके बाद धरासू, नालूपानी जैसे क्षेत्रों में भी भूस्खलन का खतरा लगातार बना हुआ है, जहां सड़क चौड़ीकरण कार्य के दौरान हालात और संवेदनशील हो गए हैं।
आपदा के दौरान नदी के तेज बहाव में बह चुकी सड़कों के स्थान पर अस्थायी कच्चे मार्ग तैयार किए गए हैं, जो भारी वाहनों और लगातार यातायात का दबाव सहन करने में सक्षम नहीं हैं। यही कारण है कि इन हिस्सों में यात्रा के दौरान किसी भी समय मार्ग बाधित होने की आशंका बनी रहती है।
धरासू बैंड के पास बनाई गई सुरक्षा दीवार भी एक ही बरसात में क्षतिग्रस्त हो गई, जिससे वहां भू-धंसाव की स्थिति उत्पन्न हो गई। इसके बावजूद एक वर्ष बीतने के बाद भी उस क्षेत्र में स्थायी सुधार कार्य नहीं हो सका है।
उत्तरकाशी से लेकर गंगोत्री धाम तक भटवाड़ी, सोनगाड़, डबरानी और हर्षिल जैसे क्षेत्रों में भी हालात जस के तस हैं। कई स्थानों पर पहाड़ियों पर बड़े-बड़े बोल्डर लटके हुए हैं, जो कभी भी गिरकर दुर्घटना का कारण बन सकते हैं।
स्थानीय लोगों और यात्रियों की चिंता इस बात को लेकर भी है कि प्रशासन द्वारा सड़क सुधार के लिए तय समयसीमा पूरी होने के बावजूद कार्य अधूरा है। हालांकि सीमा सड़क संगठन का कहना है कि संवेदनशील स्थानों पर कंक्रीट ब्लॉक बिछाकर यातायात सुचारू रखा जाएगा और हर समय मशीनरी तैनात रहेगी।
चारधाम यात्रा के मद्देनजर यह मार्ग अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए यह स्पष्ट है कि इस बार यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। यदि समय रहते ठोस और स्थायी समाधान नहीं किए गए, तो भूस्खलन जोन इस यात्रा की सबसे बड़ी परीक्षा साबित हो सकते हैं।




