
उत्तरकाशी: Uttarkashi जिले के Harsil क्षेत्र में Bhagirathi River पर आपदा के दौरान बनी झील अब गंभीर खतरे का कारण बनती जा रही है। बीते वर्ष अगस्त में आई आपदा के बाद बनी यह झील नौ माह बीत जाने के बावजूद अब तक सामान्य नहीं हो सकी है। जलस्तर में कोई खास कमी नहीं आई है, जिससे स्थानीय लोगों और प्रशासन की चिंता बढ़ गई है।
स्थानीय निवासियों के अनुसार, वर्तमान में पानी का स्तर अपेक्षाकृत कम होने के बावजूद झील करीब एक किलोमीटर तक फैली हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि सिंचाई विभाग ने नदी को चैनलाइज करने का कार्य तो किया, लेकिन पानी की निकासी के लिए कोई ठोस और प्रभावी व्यवस्था नहीं की गई। परिणामस्वरूप नदी का बहाव मलबे से टकराकर पुनः झील की ओर लौट रहा है, जिससे जलभराव की स्थिति बनी हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते उचित प्रबंधन नहीं किया गया, तो आगामी मानसून में यह झील बड़े खतरे का रूप ले सकती है। विशेष रूप से तेलगाड़ नदी के उफान पर आने की स्थिति में मलबा और पानी का दबाव बढ़ेगा, जो झील के जलस्तर को अचानक बढ़ा सकता है। इससे Harsil कस्बे और आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न होने की आशंका है।
स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि कस्बे की सुरक्षा के नाम पर केवल वायरक्रेट (लोहे के जाल) लगाकर औपचारिकता पूरी कर दी गई है, जबकि स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए। इससे ग्रामीणों में आक्रोश और असंतोष भी देखने को मिल रहा है।
वहीं, सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता सचिन सिंघल का कहना है कि झील के जलस्तर को नियंत्रित करने के लिए नदी को चैनलाइज किया गया है और अन्य सुरक्षात्मक कार्य भी किए जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
इसके बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि यदि झील का जलस्तर समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया, तो यह क्षेत्र के लिए बड़ी आपदा का कारण बन सकता है। ऐसे में प्रशासन और संबंधित विभागों के लिए यह आवश्यक हो गया है कि वे त्वरित और प्रभावी उपाय सुनिश्चित करें, ताकि संभावित खतरे को टाला जा सके।




