
देहरादून: किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) घोटाले में सीबीआई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए उत्तराखंड ग्रामीण बैंक के पूर्व शाखा प्रबंधक और एक किसान को दोषी ठहराया है। विशेष न्यायाधीश सीबीआई की अदालत ने पूर्व प्रबंधक को चार साल की सजा और 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है, जबकि एक किसान को एक साल की कैद और 30 हजार रुपये का जुर्माना सुनाया गया है।
यह मामला वर्ष 2014-15 के दौरान बाजपुर शाखा में हुए घोटाले से जुड़ा है, जिसमें बैंक प्रबंधक ने ट्रैक्टर डीलर और कुछ किसानों के साथ मिलीभगत कर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर करोड़ों रुपये के केसीसी लोन स्वीकृत किए। जांच में पाया गया कि यह ऋण खेती के बजाय अन्य कार्यों में उपयोग किया गया और बड़ी राशि ट्रैक्टर डीलर के खाते में ट्रांसफर कर दी गई।
सीबीआई जांच के अनुसार, इस घोटाले में करीब 2.85 करोड़ रुपये का ऋण अनियमित तरीके से वितरित किया गया, जिससे बैंक को कुल मिलाकर 3.15 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इसके अलावा, बिना मार्जिन मनी के कृषि टर्म लोन स्वीकृत कर उन्हें केसीसी खातों के जरिए समायोजित किया गया और पूरी राशि डीलर के खाते में भेज दी गई।
जांच में यह भी सामने आया कि कई लाभार्थियों को अयोग्य होने के बावजूद लोन दिया गया। कुछ आरोपियों ने अपने अपराध स्वीकार भी किए, जिसके आधार पर उन्हें दोषी करार दिया गया। इस मामले में सीबीआई ने 36 गवाह पेश किए, जिनके आधार पर अदालत ने साक्ष्यों को पर्याप्त मानते हुए दोषियों को सजा सुनाई।
इस फैसले को बैंकिंग प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। साथ ही, यह संदेश भी गया है कि सरकारी योजनाओं में किसी भी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।




