
देहरादून: उत्तराखंड में बेरोजगारी एक गंभीर समस्या के रूप में सामने है, जहां 10 लाख से अधिक युवा रोजगार की तलाश में हैं, लेकिन इसके बावजूद रोजगार और कौशल विकास का बड़ा अवसर देने वाली प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना को पर्याप्त आवेदन नहीं मिल पा रहे हैं। यह स्थिति न केवल चिंताजनक है, बल्कि युवाओं और अभिभावकों में जागरूकता की कमी को भी दर्शाती है।
राज्य में इस योजना के तहत बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा 500 से अधिक युवाओं को इंटर्नशिप और संभावित रोजगार देने की तैयारी की गई है। इसके बावजूद 31 मार्च 2026 तक बेहद कम आवेदन प्राप्त हुए, जो यह संकेत देता है कि योजना की जानकारी जमीनी स्तर तक प्रभावी ढंग से नहीं पहुंच पाई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षण संस्थानों, छात्रों और अभिभावकों के बीच इस योजना को लेकर पर्याप्त जागरूकता नहीं है। कई छात्र इस अवसर के महत्व को समझ नहीं पा रहे हैं, जबकि अभिभावक भी अपने बच्चों को इस दिशा में मार्गदर्शन देने में सक्रिय भूमिका नहीं निभा रहे हैं।
प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना के तहत 18 से 25 वर्ष तक के युवा आवेदन कर सकते हैं। इसमें 6 से 9 महीने तक की इंटर्नशिप दी जाती है, जिसके दौरान अभ्यर्थियों को प्रति माह 9000 रुपये का वजीफा भी मिलता है। साथ ही, प्रदर्शन के आधार पर उन्हें संबंधित कंपनी में स्थायी नौकरी का अवसर भी मिल सकता है।
राज्य में 94 हजार से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (एमएसएमई) तथा 400 से अधिक बड़ी और मध्यम औद्योगिक इकाइयां हैं, जो इस योजना के माध्यम से युवाओं को प्रशिक्षित करने के लिए इच्छुक हैं। इसके बावजूद आवेदन की धीमी गति प्रशासन और शिक्षा विभाग के लिए चुनौती बन गई है।
सरकार ने योजना के प्रचार-प्रसार के लिए उच्च शिक्षा विभाग के माध्यम से विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, आईटीआई और पॉलिटेक्निक संस्थानों को निर्देश जारी किए हैं कि अधिक से अधिक छात्रों को आवेदन के लिए प्रेरित किया जाए।
योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया 15 मार्च से शुरू हो चुकी है और 15 अप्रैल अंतिम तिथि निर्धारित की गई है। ऐसे में युवाओं के पास अभी भी इस सुनहरे अवसर का लाभ उठाने का समय है। यदि समय रहते जागरूकता बढ़ाई गई, तो यह योजना न केवल बेरोजगारी कम करने में सहायक हो सकती है, बल्कि युवाओं को बेहतर करियर की दिशा भी प्रदान कर सकती है।




