
देहरादून। Chaitra Navratri के शुभ अवसर पर जहां एक ओर मां दुर्गा की आराधना की जा रही है, वहीं दूसरी ओर प्रदेश में घटते लिंगानुपात ने गंभीर चिंता खड़ी कर दी है। इस बार नवरात्र केवल पूजा-अर्चना तक सीमित न रहकर समाज को बेटियों के महत्व को समझने और संतुलन बनाए रखने का संदेश भी दे रहा है।
हॉस्पिटल इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम (HIMS) द्वारा जारी हालिया आंकड़ों के अनुसार उत्तराखंड के 13 में से 11 जिलों में लिंगानुपात 950 से कम दर्ज किया गया है। यानी प्रति 1000 लड़कों पर 950 से भी कम लड़कियां हैं। इतना ही नहीं, तीन जिलों में यह आंकड़ा 900 से नीचे पहुंच गया है, जो बेहद चिंताजनक स्थिति को दर्शाता है।
यदि इन आंकड़ों की तुलना National Family Health Survey-5 (2020-21) से की जाए, तो स्पष्ट होता है कि कई जिलों में स्थिति और खराब हुई है। पहले जहां कुछ जिलों में लिंगानुपात 1000 से अधिक था, वहीं अब गिरावट दर्ज की गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, पहाड़ी क्षेत्रों में पलायन भी घटते लिंगानुपात का एक बड़ा कारण बनकर सामने आया है। कई परिवारों में रोजगार के लिए पुरुषों के बाहर जाने और सामाजिक सोच के कारण बेटियों की संख्या प्रभावित हो रही है।
इस पावन पर्व पर समाज से अपील की जा रही है कि बेटियों के प्रति सोच में बदलाव लाया जाए और उनके जन्म, शिक्षा व सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए, ताकि समाज में संतुलन और समानता कायम रह सके।




