
उत्तरकाशी | उत्तरकाशी जिले में 5 अगस्त को आई आपदा के 20 दिन बीत चुके हैं, लेकिन प्रभावित क्षेत्रों में हालात अभी सामान्य नहीं हो पाए हैं। धराली क्षेत्र में आई प्रलयंकारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद अब रसद और रसोई गैस का संकट गहराने लगा है। आठ सीमांत गांवों के ग्रामीण न सिर्फ भोजन व ईंधन की कमी से जूझ रहे हैं, बल्कि बिजली और संचार सेवाएं ठप पड़ने से उनका जीवन और अधिक कठिन हो गया है।
गंगोत्री हाईवे न खुलने से बढ़ी मुश्किलें
गंगोत्री हाईवे अभी तक बड़े वाहनों के लिए नहीं खुल पाया है। यही वजह है कि प्रभावित गांवों तक आवश्यक सामग्री की आपूर्ति में गंभीर समस्या बनी हुई है। जिला प्रशासन ने कुछ हद तक राहत सामग्री पहुँचाई है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि बड़ी आबादी और लंबे समय तक चलने वाली जरूरतों के लिए यह अपर्याप्त है।
आठ गांवों में अब भी संकट
धराली, सुक्की, मुखबा, हर्षिल, जसपुर, पुराली, झाला और बगोरी जैसे गांवों में हालात अब भी सुधर नहीं पाए हैं।
- खीर गंगा और तेलगाड़ नालों का जल प्रवाह अब भी लोगों के लिए भय का कारण बना हुआ है।
- बीते रविवार की रात को तेलगाड़ का उफान इतना तेज था कि हर्षिल के ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पलायन करना पड़ा।
बिजली और संचार सेवा बंद
आपदा से प्रभावित छह गांवों में पिछले रविवार से बिजली आपूर्ति ठप है। रात के अंधेरे में ग्रामीण भय और असुरक्षा के माहौल में समय काटने को मजबूर हैं। सोमवार सुबह से संचार सेवाएँ भी बंद हो गईं। मोबाइल नेटवर्क न होने से लोग अपने परिजनों से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं, जिससे उनकी चिंता और बढ़ गई है।
प्रशासन की चुनौतियाँ
जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी शार्दुल गुसाईं ने बताया कि गंगोत्री हाईवे पर नलूणा के पास भारी भूस्खलन के कारण बिजली और संचार लाइनों को गंभीर नुकसान पहुँचा है। लगातार हो रहे भूस्खलन के चलते मरम्मत कार्य शुरू करना संभव नहीं हो पा रहा है। अधिकारी ने कहा कि जैसे ही भूस्खलन थमेगा, बिजली और संचार बहाली का काम शुरू किया जाएगा।
ग्रामीणों की गुहार
हर्षिल के पूर्व प्रधान दिनेश रावत ने बताया कि हाईवे बंद होने से आपूर्ति ठप है और आठों गांवों में रसोई गैस और खाद्यान्न का संकट तेजी से बढ़ रहा है। प्रशासन द्वारा दी गई सीमित राहत सामग्री बड़े परिवारों के लिए बिल्कुल भी पर्याप्त नहीं है। उन्होंने मांग की है कि प्रशासन जल्द से जल्द हाईवे को बड़े वाहनों की आवाजाही लायक बनाए ताकि आपूर्ति सामान्य हो सके।
डर और असुरक्षा का माहौल
बारिश और भूस्खलन से प्रभावित ग्रामीण अभी भी भय के साये में जी रहे हैं। एक तरफ भोजन और रसोई गैस का संकट है, वहीं दूसरी तरफ बिजली और नेटवर्क की समस्या ने जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए स्थिति और अधिक कठिन हो गई है।