
चमोली। उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदाओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। उत्तरकाशी में बादल फटने की घटना के कुछ ही दिन बाद शुक्रवार देर रात चमोली जिले की थराली तहसील भी भीषण आपदा की चपेट में आ गई। थराली में बादल फटने से भारी तबाही हुई है, जिसमें अब तक एक युवती की मौत हो चुकी है और एक व्यक्ति लापता बताया जा रहा है। क्षेत्र में 90 से अधिक परिवार प्रभावित हुए हैं।
आपदा से भारी नुकसान
आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, बादल फटने की इस घटना से करीब 15 किलोमीटर के दायरे में तबाही हुई है। कई घर मलबे में दब गए हैं, खेतों में खड़ी फसल बर्बाद हो गई है और सड़कों का नेटवर्क पूरी तरह ध्वस्त हो गया है। सिमली-ग्वालदम राष्ट्रीय राजमार्ग सहित 10 से अधिक सड़कें बंद हो गई हैं। बीआरओ और लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) की टीम जेसीबी मशीनों की मदद से मार्ग खोलने में जुटी हुई हैं।
राहत व बचाव कार्य
प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य तेज कर दिया है। कुलसारी में राहत शिविर बनाए गए हैं, जहां आपदा प्रभावित परिवारों को अस्थायी ठिकाना और भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास, विनोद कुमार सुमन ने बताया कि अब तक एक युवती का शव बरामद किया गया है जबकि एक अन्य लापता व्यक्ति की तलाश जारी है।
सीएम धामी का दौरा
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी रविवार को थराली पहुंचे। उन्होंने हेलीकॉप्टर से कुलसारी में बने राहत शिविर का निरीक्षण किया और आपदा प्रभावितों से सीधे मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। सीएम धामी ने प्रभावित परिवारों को राहत राशि के चेक वितरित किए और भरोसा दिलाया कि पुनर्वास और पुनर्निर्माण में कोई कोताही नहीं बरती जाएगी।
सीएम धामी ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि “प्रभावित परिवारों को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए। उनकी सभी आवश्यकताओं का तुरंत समाधान किया जाए।”
नाराजगी भी जताई प्रभावितों ने
इस दौरान आपदा प्रभावितों ने मुख्यमंत्री के सामने अपनी नाराजगी भी जताई। उन्होंने कहा कि प्रशासन की ओर से शुरुआती मदद देर से मिली और कई परिवार अब भी जरूरी सुविधाओं से वंचित हैं। सीएम ने आश्वासन दिया कि शिकायतों का तुरंत निवारण किया जाएगा।
पुनर्वास की चुनौती
विशेषज्ञों का कहना है कि थराली की भौगोलिक स्थिति और बार-बार आने वाली प्राकृतिक आपदाओं को देखते हुए यहां पुनर्वास और आधारभूत ढांचे का पुनर्निर्माण बड़ी चुनौती होगी। सरकार ने बुनियादी ढांचे को बहाल करने के लिए युद्ध स्तर पर काम शुरू कर दिया है।