
देहरादून: उत्तराखंड की चर्चित मसूरी विधानसभा सीट पर आगामी चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज होती जा रही हैं। भाजपा के लिए यह सीट आने वाले समय में चुनौतीपूर्ण बन सकती है, क्योंकि एक ओर जहां कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी लगातार तीसरी बार यहां से विधायक हैं, वहीं अब कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए पूर्व मंत्री दिनेश अग्रवाल ने भी इस सीट से चुनाव लड़ने के संकेत देकर राजनीतिक चर्चाओं को हवा दे दी है।
करीब 55 वर्षों तक कांग्रेस से जुड़े रहे पूर्व मंत्री दिनेश अग्रवाल ने स्पष्ट कहा है कि मसूरी विधानसभा उनके लिए नई नहीं है। उन्होंने बताया कि उनका घर भी लंबे समय तक मसूरी क्षेत्र में रहा है और वह इस क्षेत्र की राजनीतिक तथा सामाजिक परिस्थितियों से भलीभांति परिचित हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल मसूरी और धर्मपुर दोनों सीटों पर “वैकेंसी” नहीं है, लेकिन यदि पार्टी नेतृत्व उन्हें चुनाव लड़ने की जिम्मेदारी देता है तो वह पीछे नहीं हटेंगे।
अमर उजाला से विशेष बातचीत में दिनेश अग्रवाल ने कांग्रेस छोड़ने के पीछे की वजहों को भी विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में सम्मान की संस्कृति धीरे-धीरे खत्म हो गई थी। परिवारवाद और कुछ नेताओं के बढ़ते प्रभाव के कारण पुराने कार्यकर्ताओं की उपेक्षा होने लगी थी। उन्होंने कहा कि शीर्ष नेतृत्व से मिलने तक के लिए महीनों इंतजार करना पड़ता था और पार्टी के भीतर संवाद की कमी बढ़ती जा रही थी।
अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने 1968 में कांग्रेस की सदस्यता ली थी और पार्टी के लिए लंबा समय दिया। उनका कहना था कि कांग्रेस ने उन्हें बहुत कुछ दिया, लेकिन समय के साथ पार्टी की कार्यशैली बदलती चली गई। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस में कुछ नेताओं को बार-बार जिम्मेदारी दी जा रही है, जबकि जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी की जा रही है।
भाजपा में शामिल होने के फैसले पर उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व, कार्यशैली और लोगों को पहचानने की क्षमता ने उन्हें प्रभावित किया। साथ ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की कार्यसंस्कृति और सक्रियता की भी उन्होंने खुलकर सराहना की। अग्रवाल ने कहा कि भाजपा में उन्हें शीर्ष नेतृत्व से सम्मान मिला और यही बात उन्हें सबसे अधिक प्रभावित करती है।
उन्होंने मुख्यमंत्री धामी को ऊर्जावान और निरंतर काम करने वाला नेता बताते हुए कहा कि उनमें राज्य को आगे बढ़ाने की जबरदस्त क्षमता है। अग्रवाल ने यह भी कहा कि भाजपा में आने के बाद उन्हें संगठन की कार्यशैली और अनुशासन बेहतर महसूस हुआ।
मसूरी सीट पर दावेदारी को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि वह पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता हैं और संगठन उन्हें जो भी जिम्मेदारी देगा, उसे निभाएंगे। उन्होंने यहां तक कहा कि यदि पार्टी उन्हें पन्ना प्रमुख की जिम्मेदारी भी देती है तो वह उसे भी पूरी निष्ठा से निभाएंगे। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि पार्टी चुनाव लड़ने का अवसर देती है तो वह इसके लिए भी पूरी तरह तैयार हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मसूरी सीट पर भाजपा के भीतर बढ़ती दावेदारी आने वाले समय में संगठन के लिए चुनौती खड़ी कर सकती है। लगातार तीन बार से विधायक गणेश जोशी की मजबूत पकड़ के बावजूद नए दावेदारों की सक्रियता इस सीट को राजनीतिक रूप से और अधिक दिलचस्प बना रही है।




