
देहरादून: पेट्रोलियम पदार्थों की बचत का संदेश देने के उद्देश्य से स्कूटी चलाकर घर पहुंचे उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी अब सोशल मीडिया पर चर्चा और ट्रोलिंग का विषय बन गए हैं। ईंधन बचाने की पहल के रूप में शुरू हुई यह कवायद उस समय विवादों में घिर गई, जब पता चला कि जिस स्कूटी पर मंत्री सवार हुए थे उसका इंश्योरेंस और प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) दोनों की वैधता समाप्त हो चुकी थी।
दरअसल, गढ़ी कैंट क्षेत्र में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होने के बाद कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने सरकारी वाहन का उपयोग न करते हुए स्कूटी से अपने आवास तक जाने का निर्णय लिया। मंत्री का कहना था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पेट्रोलियम पदार्थों की बचत की अपील की है। इसी संदेश को व्यवहार में उतारने के लिए उन्होंने यह कदम उठाया।
हालांकि, मंत्री जिस स्कूटी पर बैठे थे, वह उनके स्टाफ के एक कर्मचारी की बताई जा रही है। बाद में सामने आया कि स्कूटी का इंश्योरेंस और प्रदूषण प्रमाणपत्र दोनों एक्सपायर हो चुके हैं। इतना ही नहीं, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और तस्वीरों में यह भी देखा गया कि स्कूटी के पीछे मंत्री का सरकारी वाहन भी चल रहा था। इसके बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने मंत्री की पहल पर सवाल उठाने शुरू कर दिए।
मामला तूल पकड़ने के बाद मंत्री गणेश जोशी ने सफाई देते हुए कहा कि उनका उद्देश्य केवल ईंधन बचत के प्रति लोगों को जागरूक करना था। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के बाद अचानक उन्होंने स्टाफ की स्कूटी से घर जाने का फैसला किया और बाद में जानकारी मिली कि उसके दस्तावेजों की अवधि समाप्त हो चुकी थी।
विवाद बढ़ने पर संबंधित कर्मचारी ने भी एसएसपी को पत्र भेजकर नियमों के तहत जो भी जुर्माना बनता है, उसे लगाने का अनुरोध किया है। इस कदम को लेकर सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने मंत्री की पहल की सराहना की, जबकि कई यूजर्स ने यातायात नियमों के पालन को लेकर सवाल उठाए।
मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि वह भविष्य में भी छोटी दूरी के लिए दोपहिया वाहनों का उपयोग करेंगे ताकि ईंधन की बचत हो सके। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि लंबी दूरी के लिए वाहन का इस्तेमाल जरूरी है, लेकिन काफिले में शामिल वाहनों की संख्या कम करने का प्रयास किया जाएगा।




