
देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून सहित पूरे प्रदेश में इस बार मार्च का मौसम काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा। जहां महीने के शुरुआती दो सप्ताह में तेज गर्मी ने लोगों को परेशान किया, वहीं आखिरी सप्ताह में ठंड ने फिर से दस्तक दे दी। परिणामस्वरूप मार्च का चौथा सप्ताह पिछले दस वर्षों में सबसे सर्द दर्ज किया गया।
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, बीते कुछ दिनों से मैदानी क्षेत्रों का तापमान सामान्य के आसपास बना रहा, लेकिन पर्वतीय क्षेत्रों में पारा सामान्य से नीचे पहुंच गया। यही कारण रहा कि पहाड़ों में एक बार फिर ठंड का एहसास बढ़ गया।
दरअसल, मार्च के तीसरे सप्ताह में हुई बेमौसम बारिश और बर्फबारी का असर अंतिम सप्ताह तक बना रहा। इसके चलते तापमान में गिरावट दर्ज की गई और मौसम सुहावना होने के साथ ठंडक भी बढ़ गई।
आंकड़ों पर नजर डालें तो महीने की शुरुआत में तापमान काफी ऊंचा था। पांच मार्च को दून में अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था, जो सामान्य से पांच डिग्री अधिक था। वहीं न्यूनतम तापमान भी सामान्य से ऊपर दर्ज किया गया।
पर्वतीय क्षेत्रों में भी शुरुआती दिनों में तापमान में बढ़ोतरी देखी गई। मुक्तेश्वर में अधिकतम तापमान सामान्य से 10 डिग्री अधिक दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी रही।
हालांकि, बाद के दिनों में मौसम ने करवट ली और बादल छाए रहने के साथ तेज हवाएं चलने लगीं। इससे तापमान में गिरावट आई और वातावरण में ठंडक बढ़ गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मौसमीय बदलाव पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के कारण हो रहे हैं, जिससे बारिश और बर्फबारी की घटनाएं बढ़ी हैं। आने वाले दिनों में भी मौसम इसी तरह बदलता रह सकता है।
कुल मिलाकर, इस बार मार्च ने गर्मी और ठंड दोनों का अनुभव कराते हुए लोगों को चौंका दिया है, जिससे मौसम के बदलते रुझानों पर भी चर्चा तेज हो गई है।





