
नई दिल्ली/मध्य पूर्व: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आज अहम बैठक होने जा रही है, जिसमें ईरान और इज़राइल के बीच बढ़ते सैन्य टकराव पर चर्चा की जाएगी। इस बीच इज़राइल के हाईफा पोर्ट के पास ड्रोन हमले की खबर ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
संघर्ष के बीच अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने ईरान के बुशहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र के आसपास हुए हमलों पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि इस सक्रिय परमाणु संयंत्र को नुकसान पहुंचता है, तो इससे बड़े पैमाने पर रेडियोलॉजिकल हादसा हो सकता है, जिसका असर पूरे क्षेत्र पर पड़ेगा।
हालिया घटनाक्रम में इज़राइल ने ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया है, जबकि जवाब में ईरान ने मिसाइलों और ड्रोन के जरिए इज़राइल और खाड़ी क्षेत्र में हमले किए हैं। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने “ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस” के तहत अमेरिकी और इजरायली सैन्य ठिकानों पर हमलों की नई लहर शुरू करने का दावा किया है।
इस बीच डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के लिए दी गई समयसीमा 6 अप्रैल तक बढ़ा दी है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि फिलहाल ईरान के ऊर्जा संयंत्रों पर सीधा हमला नहीं किया जाएगा, हालांकि युद्धविराम को लेकर कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है।
इज़राइली सेना के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एयाल ज़मीर ने भी चेतावनी दी है कि लगातार बढ़ते सैन्य दबाव और संसाधनों की कमी के कारण सेना पर गंभीर असर पड़ सकता है। वहीं, इज़राइल ने ईरानी नौसेना कमांडर अलीरजा तंगसिरी को मार गिराने का दावा किया है, जो होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की रणनीति से जुड़े थे।
इस संघर्ष का असर वैश्विक स्तर पर भी दिखने लगा है। होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण गैस और तेल की आपूर्ति प्रभावित हो रही है, जिससे उर्वरक उत्पादन और खाद्य आपूर्ति पर संकट गहराने की आशंका है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति जल्द नियंत्रित नहीं हुई, तो इसका असर दुनिया भर की अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा पर पड़ेगा।
कुल मिलाकर, मध्य पूर्व में तेजी से बिगड़ते हालात ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है, और आज होने वाली सुरक्षा परिषद की बैठक को इस संकट के समाधान की दिशा में अहम माना जा रहा है।







