
देहरादून। दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का उत्तराखंड से भी खास जुड़ाव रहा है। चमोली जिले के जोशीमठ और चीन सीमा से सटी नीती घाटी में मराठी फिल्म की शूटिंग के दौरान उन्होंने यहां के प्राकृतिक सौंदर्य और शांत वातावरण को करीब से महसूस किया था। इस दौरान वह स्थानीय लोगों से भी घुले-मिले और उन्होंने भविष्य में जोशीमठ में जमीन खरीदकर यहीं रहने की इच्छा जताई थी।
हर दिशा से जुड़ रहा "उत्तराखण्ड"
नाना पाटेकर मराठी फिल्म की शूटिंग के सिलसिले में चमोली जिले के जोशीमठ क्षेत्र पहुंचे थे। फिल्म की शूटिंग नीती घाटी के नीती गांव, तपोवन और लाता क्षेत्र में हुई थी। फिल्म की यूनिट ने यहां करीब नौ दिनों तक शूटिंग की। इसके बाद नाना पाटेकर हेलिकॉप्टर से रुद्रप्रयाग जिले के गुप्तकाशी के लिए रवाना हुए थे।
जोशीमठ की वादियों के हो गए थे मुरीद
शूटिंग के दौरान नाना पाटेकर ने स्थानीय लोगों से बातचीत की और यहां के रहन-सहन, मौसम तथा वेशभूषा के बारे में जानकारी ली। स्थानीय लोगों के अनुसार, वह यहां की प्राकृतिक सुंदरता से काफी प्रभावित हुए थे। बातचीत के दौरान उन्होंने कहा था कि यहां की वादियां उन्हें बेहद खूबसूरत लगीं और उन्होंने भविष्य में यहां जमीन खरीदकर रहने की इच्छा जताई थी।
स्वरोजगार एवं उद्यमिता योजनाएँ
जोशीमठ की तत्कालीन एसडीएम कुमकुम जोशी ने भी नाना पाटेकर से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्हें स्थानीय सेब और अखरोट भेंट किए गए थे।
सेना के जवानों से भी की मुलाकात
नीती घाटी में शूटिंग के दौरान नाना पाटेकर ने सेना की ब्रिगेड में अधिकारियों और जवानों से भी मुलाकात की थी। बताया गया कि उन्होंने मराठी और तेलुगु भाषा बोलने वाले जवानों से उनकी ही बोली-भाषा में बातचीत की। इस दौरान जवानों के साथ उन्होंने हंसी-मजाक भी किया।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, नाना पाटेकर का व्यवहार बेहद सहज था। वह शूटिंग के अलावा आसपास के क्षेत्र और यहां के लोगों के बारे में जानने में भी रुचि लेते थे।
स्थानीय लोगों से पूछे तीर्थ और पर्यटन स्थलों के बारे में
फिल्म यूनिट के साथ जुड़े स्थानीय लोगों ने बताया था कि नाना पाटेकर ने चमोली के तीर्थस्थलों और पर्यटन स्थलों के बारे में भी जानकारी ली थी। उन्होंने क्षेत्र के मौसम और यहां के जीवन को लेकर कई सवाल किए।
मलारी के देव सिंह राणा और अग्गी राणा के अनुसार, नाना पाटेकर सरल स्वभाव के व्यक्ति थे। उन्होंने यहां के रहन-सहन और वेशभूषा के बारे में जानकारी ली तथा यहां मकान बनाने की इच्छा भी जताई थी।
महेंद्र चौहान ने बताया था कि वह नाना पाटेकर के साथ करीब 15 मिनट तक रहे थे। इस दौरान अभिनेता ने आसपास के तीर्थस्थलों और पर्यटन स्थलों के बारे में बातचीत की थी।
नाना पाटेकर की जोशीमठ और नीती घाटी से जुड़ी ये यादें उनके उत्तराखंड प्रवास को खास बनाती हैं। फिल्म की शूटिंग के लिए पहुंचे अभिनेता ने यहां केवल अपने काम को पूरा नहीं किया, बल्कि स्थानीय लोगों और क्षेत्र की प्राकृतिक खूबसूरती से भी जुड़ाव महसूस किया था।






