
देहरादून ( उत्तराखण्ड) संयुक्त नागरिक संगठन द्वारा वनमंत्री सुबोध उनियाल, सचिव वन व प्रमुख वन संरक्षक को लिखे गए पत्रों में कहा गया है की उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पाए जाने वाले बुग्यालों(मखमली घास के मैदानों)का संरक्षण पर्यावरण,जैव-विविधता और आजीविका तीनों के लिए बेहद आवश्यक है। यहां अनियंत्रित मानवीय दखल और पर्यटकों द्वारा फैलाई जा रही गंदगी से इनकी प्राकृतिक सुंदरता और मिट्टी की सेहत बिगड़ रही है।भूस्खलन और भू-कटाव के उपायों के अन्तर्गत अनियोजित पर्यटन और ढलान पर गलत गतिविधियों के कारण कई बुग्याल दरक रहे हैं और भू-कटाव बढ़ रहा है।इन विषयों को रेखांकित करते हुए कहा गया है की बुग्याल जल स्रोतों का संरक्षण करते हैं।ये घास के मैदान प्राकृतिक स्पंज की तरह काम करते हैं जो वर्षा और पिघलती बर्फ के पानी को सहेजकर स्थायी जल स्रोत को पोषित करते हैं। इसलिए बुग्यालों में दुर्लभ वन्यजीवों की रक्षा की जानी जरूरी है क्योंकि यहां कस्तूरी मृग,हिम तेंदुआ और अन्य दुर्लभ हिमालयी जीवों के प्राकृतिक आवास हैं और इनके संरक्षण से वन्यजीवों का अस्तित्व सुरक्षित रहता है।पत्रों के आखिर में अनुरोध किया गया है की बुग्यालों में कचरा प्रबंधन के अंतर्गत प्लास्टिक और अन्य गैर-बायोडिग्रेडेबल कचरे को बुग्यालों में छोड़ना पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाय।बुग्यालों में कंक्रीट के जंगल न पनप सके इसके लिए यहां स्थायी या पक्के ढांचों के निर्माण की अनुमति बिल्कल नहीं दी जाय।बुग्यालों में इको-टूरिज्म नियमों के पालन हेतु कठोर निर्देश जारी किए जाय।
संयुक्त नागरिक संगठन के सचिव सुशील त्यागी ने बताया कि ज्ञापन देने वालो में गिरीश चंद्र भट्ट, ठाकुर शेरसिंह, अवधेश शर्मा,उमेश्वर सिंह रावत, राजीव खनसाली,नरेश चंद्र कुलाश्री,दिनेश भंडारी, डा.राकेश डंगवाल थे।




