
देहरादून। उत्तराखंड में बिजली चोरी करने, मीटर तोड़ने या यूपीसीएल की विद्युत संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों पर अब पहले से अधिक सख्ती होगी। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने केंद्र सरकार के जन विश्वास अधिनियम के प्रावधानों को राज्य में लागू करते हुए विद्युत क्षेत्र से जुड़े कई उल्लंघनों के लिए जुर्माने की नई व्यवस्था लागू की है। इसके तहत बिजली चोरी और विद्युत आपूर्ति से संबंधित सामग्री को लापरवाही से तोड़ने या नुकसान पहुंचाने के मामलों में जुर्माने की अधिकतम सीमा बढ़ाकर एक लाख रुपये तक कर दी गई है।
आयोग की ओर से जारी आदेश के बाद बिजली से जुड़े विभिन्न प्रावधानों में आर्थिक दंड की राशि में बदलाव किया गया है। इसका उद्देश्य छोटे और तकनीकी प्रकृति के उल्लंघनों को लेकर दंड की व्यवस्था को अधिक स्पष्ट करना और निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित करना है।
बिजली चोरी पर अब एक लाख रुपये तक जुर्माना
जन विश्वास अधिनियम के तहत विद्युत आपूर्ति से जुड़ी सामग्री को लापरवाही से नुकसान पहुंचाने और बिजली चोरी से संबंधित मामलों में अब अधिक आर्थिक दंड का प्रावधान किया गया है। धारा 139 के तहत आने वाले मामलों में जुर्माने की राशि 5,000 रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक हो सकती है।
इस प्रावधान में दोबारा दोषी पाए जाने वाले मामलों को भी शामिल किया गया है। यानी बिजली चोरी या संबंधित उल्लंघन की पुनरावृत्ति होने पर भी निर्धारित प्रावधानों के अनुसार जुर्माना लगाया जा सकेगा। इससे बिजली चोरी और विद्युत उपकरणों के साथ छेड़छाड़ के मामलों में आर्थिक दंड पहले की तुलना में अधिक प्रभावी हो गया है।
पहले 10 हजार रुपये तक था जुर्माना
नए प्रावधान लागू होने से पहले संबंधित मामलों में जुर्माने की सीमा 10 हजार रुपये तक बताई गई थी। अब इसे बढ़ाकर अधिकतम एक लाख रुपये तक किया गया है। इस बदलाव से बिजली चोरी, मीटर से छेड़छाड़ और विद्युत आपूर्ति से जुड़ी सामग्री को नुकसान पहुंचाने के मामलों में दंड की सीमा काफी बढ़ गई है।
विद्युत क्षेत्र में मीटर, लाइन, केबल और अन्य आपूर्ति सामग्री को नुकसान पहुंचाने से न केवल विद्युत व्यवस्था प्रभावित होती है, बल्कि इससे बिजली आपूर्ति और राजस्व पर भी असर पड़ सकता है। नए प्रावधानों के तहत ऐसे मामलों में आर्थिक दंड की व्यवस्था को अधिक स्पष्ट किया गया है।
आयोग के आदेश नहीं मानने पर पांच लाख तक जुर्माना
आयोग की ओर से जारी आदेशों या निर्देशों का पालन नहीं करने पर भी अब अधिक जुर्माना लगाया जा सकेगा। धारा 142 के तहत जुर्माने की राशि को बढ़ाकर 10 हजार रुपये से पांच लाख रुपये तक किया गया है।
इसके अतिरिक्त अन्य मामलों में जुर्माने की राशि 1,000 रुपये से 10,000 रुपये के बीच निर्धारित की जा सकती है। यह व्यवस्था संबंधित हितधारकों पर लागू होगी। इसका उद्देश्य आयोग द्वारा जारी आदेशों, निर्देशों और नियामकीय प्रावधानों के अनुपालन को सुनिश्चित करना है।
धारा 146 में भी किया गया बदलाव
जन विश्वास अधिनियम लागू होने के बाद विद्युत अधिनियम की धारा 146 से संबंधित प्रावधानों में भी बदलाव किया गया है। इसके तहत नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामलों में पहले मौजूद कारावास के प्रावधान को हटाकर जुर्माने की व्यवस्था को अधिक स्पष्ट किया गया है।
नए प्रावधानों के अनुसार ऐसे मामलों में जुर्माना 10 हजार रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक हो सकता है। वहीं छोटे स्तर के उल्लंघनों के लिए 1,000 रुपये से 50,000 रुपये तक का जुर्माना निर्धारित किया गया है।
इस बदलाव का उद्देश्य विद्युत क्षेत्र में होने वाले विभिन्न उल्लंघनों के लिए दंड की प्रकृति और राशि को स्पष्ट करना है, ताकि संबंधित मामलों में निर्धारित नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा सके।
छोटे उल्लंघनों के लिए भी तय किया गया आर्थिक दंड
नए प्रावधानों में छोटे उल्लंघनों के लिए भी अलग से आर्थिक दंड की व्यवस्था की गई है। इसके तहत मामूली या कम गंभीर प्रकृति के उल्लंघनों पर परिस्थितियों और संबंधित प्रावधानों के अनुसार 1,000 रुपये से 50,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
इससे विद्युत क्षेत्र में नियमों के उल्लंघन की गंभीरता के आधार पर दंड निर्धारित करने की व्यवस्था अधिक स्पष्ट होती है। हालांकि किसी भी मामले में अंतिम कार्रवाई संबंधित कानून, आयोग के आदेश और सक्षम अधिकारी द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार होगी।
कुछ मामलों का जुर्माने से समाधान भी संभव
अपराधों के शमन से संबंधित प्रावधानों में भी बदलाव किया गया है। धारा 135, 138 और 140 के तहत आने वाले मामलों में निर्धारित प्रावधानों के अनुसार उपयुक्त सरकार या उसके द्वारा अधिकृत अधिकारी तय राशि लेकर मामलों का समाधान कर सकेंगे।
इस व्यवस्था का उद्देश्य निर्धारित श्रेणी के मामलों में लंबी कानूनी प्रक्रिया के बजाय कानून में निर्धारित शमन प्रक्रिया के माध्यम से उनका निस्तारण करने का रास्ता उपलब्ध कराना है। हालांकि यह सुविधा किन मामलों में और किस प्रक्रिया के तहत लागू होगी, यह संबंधित कानूनी प्रावधानों और सक्षम अधिकारी की कार्रवाई पर निर्भर करेगा।
बिजली चोरी और मीटर से छेड़छाड़ पर बढ़ेगी निगरानी
नए प्रावधान लागू होने के बाद बिजली चोरी, मीटर से छेड़छाड़ और यूपीसीएल की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले मामलों में कार्रवाई के दौरान आर्थिक दंड की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। बिजली चोरी से होने वाले राजस्व नुकसान को रोकने के लिए विद्युत वितरण व्यवस्था में ऐसे मामलों की निगरानी लगातार की जाती है।
मीटर तोड़ने, मीटर से छेड़छाड़ करने या विद्युत आपूर्ति से संबंधित उपकरणों को नुकसान पहुंचाने से बिजली व्यवस्था प्रभावित होने की संभावना रहती है। ऐसे मामलों में कानून के तहत कार्रवाई के साथ निर्धारित आर्थिक दंड भी लगाया जा सकता है।
जन विश्वास अधिनियम का उद्देश्य
जन विश्वास अधिनियम का व्यापक उद्देश्य छोटे और तकनीकी प्रकृति के अपराधों तथा उल्लंघनों के लिए दंड व्यवस्था को सरल और तर्कसंगत बनाना तथा जहां संभव हो, कारावास के स्थान पर आर्थिक दंड जैसी व्यवस्थाओं को बढ़ावा देना है।
उत्तराखंड में विद्युत नियामक आयोग की ओर से संबंधित प्रावधान लागू किए जाने के बाद बिजली क्षेत्र से जुड़े उल्लंघनों के लिए जुर्माने की राशि को अलग-अलग श्रेणियों में स्पष्ट किया गया है। इससे बिजली चोरी, विद्युत संपत्ति को नुकसान और आयोग के निर्देशों की अवहेलना जैसे मामलों में कार्रवाई के लिए नियामकीय ढांचा अधिक स्पष्ट होगा।
आयोग के नए प्रावधानों के बाद अब बिजली चोरी या विद्युत संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले मामलों में संबंधित व्यक्ति या संस्था को कानून के अनुसार आर्थिक दंड का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में बिजली उपभोक्ताओं और विद्युत व्यवस्था से जुड़े अन्य हितधारकों के लिए निर्धारित नियमों का पालन करना पहले की तुलना में और महत्वपूर्ण हो गया है।





