
देहरादून। उत्तराखंड में मानसून का दौर लगातार जारी है और सोमवार को भी प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में भारी से अत्यंत भारी बारिश की संभावना जताई गई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने राज्य के लिए रेड अलर्ट जारी करते हुए लोगों को अत्यधिक सतर्क रहने की सलाह दी है। वहीं मौसम विभाग के फ्लैश फ्लड गाइडेंस सेल ने कई जिलों में अगले 24 घंटों के दौरान अचानक बाढ़, भूस्खलन और जलभराव का गंभीर खतरा जताया है।
मौसम विभाग के अनुसार लगातार हो रही बारिश के कारण कई क्षेत्रों की मिट्टी पूरी तरह संतृप्त हो चुकी है। ऐसे में नई बारिश से पहाड़ी ढलानों पर भूस्खलन, नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने और निचले इलाकों में जलभराव की आशंका काफी बढ़ गई है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि पहाड़ी क्षेत्रों में सतह पर पानी का बहाव तेज हो सकता है, जिससे फ्लैश फ्लड जैसी स्थितियां पैदा होने की संभावना बनी हुई है।
रेड अलर्ट को देखते हुए जिला प्रशासन ने व्यापक एहतियाती कदम उठाए हैं। बागेश्वर को छोड़कर देहरादून, हरिद्वार, टिहरी, रुद्रप्रयाग, चमोली समेत कुल 12 जिलों में आंगनबाड़ी केंद्रों के साथ कक्षा 1 से 12 तक के सभी सरकारी, गैर-सरकारी और निजी विद्यालयों में अवकाश घोषित किया गया है। प्रशासन ने अभिभावकों से भी बच्चों को अनावश्यक रूप से घर से बाहर न भेजने की अपील की है।
देहरादून के जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने सभी विभागाध्यक्षों, विभागीय नोडल अधिकारियों, त्वरित प्रतिक्रिया दल (QRT) और आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों को 24 घंटे सक्रिय रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि संवेदनशील स्थानों पर जेसीबी मशीनें, राहत एवं बचाव उपकरण, पर्याप्त मानव संसाधन तथा अन्य आवश्यक संसाधनों की अग्रिम तैनाती सुनिश्चित की जाए ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।
जिला प्रशासन ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि किसी भी प्रकार की आपदा, सड़क अवरोध, भूस्खलन या अन्य अप्रिय घटना की सूचना तत्काल जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र (DEOC) को उपलब्ध कराई जाए। साथ ही विभिन्न विभागों के बीच लगातार समन्वय बनाए रखते हुए हालात की निगरानी करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
मौसम विभाग ने यह भी बताया कि 20 जुलाई को रेड अलर्ट और 21 जुलाई के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान कई स्थानों पर भारी से अत्यंत भारी वर्षा होने की संभावना है। इसके चलते नदी-नालों के जलस्तर में वृद्धि, पहाड़ी मार्गों पर मलबा आने, भूस्खलन और यातायात बाधित होने जैसी परिस्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं।
प्रशासन ने आम लोगों और यात्रियों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें। विशेष रूप से नदी-नालों, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों और जोखिम वाले स्थानों के आसपास जाने से परहेज करें। लोगों से मौसम विभाग और जिला प्रशासन की ओर से जारी चेतावनियों तथा दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है, ताकि किसी भी संभावित आपदा के दौरान जन-धन की हानि को न्यूनतम रखा जा सके।




