
देहरादून। उत्तराखंड के दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में गंभीर मरीजों को समय पर बेहतर और विशेषज्ञ चिकित्सा उपलब्ध कराना स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने लंबे समय से बड़ी चुनौती रहा है। पहाड़ी क्षेत्रों से मरीजों को देहरादून, हल्द्वानी अथवा अन्य बड़े चिकित्सा केंद्रों तक पहुंचाने में कई घंटे लग जाते हैं। ऐसे में दुर्घटना, हृदय संबंधी समस्या या अन्य गंभीर आपात स्थिति में उपचार के लिए महत्वपूर्ण ‘गोल्डन ऑवर’ निकल जाने का खतरा बना रहता है। इस चुनौती से निपटने के लिए तेलंगाना में संचालित 5जी कनेक्टेड एंबुलेंस मॉडल उत्तराखंड के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।
हैदराबाद स्थित ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की ओर से संचालित इस अत्याधुनिक एंबुलेंस सेवा में मरीज को अस्पताल पहुंचने तक केवल परिवहन की सुविधा ही नहीं मिलती, बल्कि रास्ते में ही विशेषज्ञ चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। 5जी तकनीक के माध्यम से एंबुलेंस में मौजूद मरीज की महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सूचनाएं रियल-टाइम में अस्पताल के विशेषज्ञ चिकित्सकों तक पहुंचाई जा सकती हैं।
रास्ते में ही विशेषज्ञ डॉक्टरों से मिल सकेगी मदद
पीआईबी देहरादून की ओर से आयोजित मीडिया दौरे के दौरान ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल पहुंची टीम से बातचीत में संस्थान की प्राचार्य डॉ. एस. सीथा लक्ष्मी ने बताया कि तेलंगाना में सफलतापूर्वक संचालित 5जी एंबुलेंस मॉडल उत्तराखंड जैसे भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण राज्यों के लिए उपयोगी हो सकता है।
उनके अनुसार, उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में अस्पताल तक पहुंचने में अधिक समय लगना मरीजों के लिए गंभीर चुनौती बन जाता है। ऐसी स्थिति में 5जी तकनीक से लैस एंबुलेंस रास्ते में ही मरीज को विशेषज्ञ चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इससे एंबुलेंस को एक तरह से चलते-फिरते आपात चिकित्सा केंद्र के रूप में इस्तेमाल करने की संभावना बढ़ती है।
वाइटल्स और ईसीजी की रियल-टाइम निगरानी
5जी तकनीक से लैस एंबुलेंस में आधुनिक चिकित्सा उपकरण लगाए गए हैं। इन उपकरणों के माध्यम से मरीज के वाइटल्स, ईसीजी और अन्य जरूरी स्वास्थ्य संबंधी आंकड़े रियल-टाइम में अस्पताल के विशेषज्ञ चिकित्सकों तक भेजे जा सकते हैं।
विशेषज्ञ डॉक्टर स्क्रीन पर मरीज की स्थिति की निगरानी करते हुए एंबुलेंस में मौजूद चिकित्सा कर्मियों को तत्काल आवश्यक प्राथमिक और जीवनरक्षक निर्देश दे सकते हैं। इसका सबसे बड़ा लाभ यह हो सकता है कि मरीज को अस्पताल पहुंचने से पहले ही विशेषज्ञ सलाह और आवश्यक चिकित्सकीय सहायता मिलना शुरू हो जाए।
अस्पताल पहुंचने से पहले तैयार हो जाएगी इमरजेंसी टीम
इस तकनीक का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि मरीज की स्थिति की जानकारी अस्पताल तक पहले ही पहुंच जाती है। इससे मरीज के अस्पताल पहुंचने से पहले इमरजेंसी रूम और आवश्यकता पड़ने पर सर्जिकल टीम को तैयार किया जा सकता है।
गंभीर मरीजों के मामले में समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। अस्पताल पहुंचने के बाद प्रारंभिक जांच और विशेषज्ञ टीम के तैयार होने में लगने वाला समय कम किया जा सके तो उपचार की प्रक्रिया अपेक्षाकृत तेजी से शुरू हो सकती है। उत्तराखंड जैसे राज्य में, जहां कई स्थानों से बड़े अस्पताल तक पहुंचने में लंबा समय लगता है, ऐसी तकनीक का उपयोग विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है।
पहाड़ी क्षेत्रों में उपयोगी हो सकता है मॉडल
उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां मैदानी राज्यों से अलग हैं। कई पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क मार्ग कठिन हैं और दूरी के साथ यात्रा का समय भी बढ़ जाता है। ऐसे में मरीज को सीधे बड़े अस्पताल तक पहुंचाने के साथ-साथ रास्ते में विशेषज्ञ चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराना आपात चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत करने का विकल्प बन सकता है।
तेलंगाना का 5जी एंबुलेंस मॉडल इसी दिशा में एक संभावित उदाहरण प्रस्तुत करता है। हालांकि उत्तराखंड में इस मॉडल को लागू करने के लिए राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों, संचार नेटवर्क, स्वास्थ्य संस्थानों और एंबुलेंस सेवाओं की उपलब्धता को ध्यान में रखना होगा।
ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज में आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं
हैदराबाद स्थित ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। 1,044 बेड वाले इस स्वास्थ्य परिसर में 159 आईसीयू बेड, सुपर स्पेशियलिटी चिकित्सा सेवाएं और किडनी ट्रांसप्लांट जैसी सुविधाएं मौजूद हैं। संस्थान में अब तक 30 से अधिक सफल किडनी ट्रांसप्लांट किए जाने की जानकारी दी गई है।
इस तरह के संस्थान से जुड़े तकनीकी मॉडल उत्तराखंड जैसे राज्यों के लिए उपयोगी अनुभव उपलब्ध करा सकते हैं, जहां पर्वतीय क्षेत्रों में विशेषज्ञ चिकित्सा तक त्वरित पहुंच एक बड़ी चुनौती है।
कम लागत में चिकित्सा शिक्षा का भी मॉडल
मीडिया दौरे के दौरान संस्थान की चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी जानकारी भी सामने आई। देशभर में 20 ईएसआईसी मेडिकल कॉलेजों में कुल 1,755 एमबीबीएस सीटें हैं। इन संस्थानों में हॉस्टल सहित सालाना फीस करीब एक लाख रुपये बताई गई है।
इन सीटों का विभाजन 15 प्रतिशत ऑल इंडिया कोटा, 50 प्रतिशत स्टेट कोटा और 35 प्रतिशत बीमित व्यक्ति कोटे के अनुसार बताया गया है। इससे कम लागत में चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने का अवसर उपलब्ध होता है।
उत्तराखंड में मेडिकल कॉलेज की संभावना से स्थानीय युवाओं को लाभ
यदि इसी तरह का कोई संस्थान भविष्य में उत्तराखंड में स्थापित होता है तो राज्य के स्थानीय युवाओं को कम खर्च में चिकित्सा शिक्षा हासिल करने का अवसर मिल सकता है। इससे प्रदेश में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने में भी मदद मिल सकती है।
उत्तराखंड में पर्वतीय क्षेत्रों में चिकित्सकों और विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता लंबे समय से चुनौती बनी हुई है। ऐसे में आधुनिक चिकित्सा शिक्षा संस्थानों के विस्तार के साथ तकनीक आधारित आपात चिकित्सा सेवाओं को मजबूत करना स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
5जी तकनीक से आपात चिकित्सा व्यवस्था में बदलाव की संभावना
5जी कनेक्टेड एंबुलेंस का मॉडल यह संभावना दिखाता है कि एंबुलेंस को केवल मरीज को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने वाले वाहन के बजाय प्रारंभिक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने वाले मोबाइल प्लेटफॉर्म के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। रियल-टाइम स्वास्थ्य आंकड़ों के आदान-प्रदान और विशेषज्ञ डॉक्टरों से तत्काल संपर्क की सुविधा गंभीर मरीजों के उपचार में उपयोगी हो सकती है।
उत्तराखंड में यदि इस तरह की व्यवस्था को स्थानीय जरूरतों के अनुरूप विकसित किया जाता है तो दुर्गम क्षेत्रों के मरीजों को बड़े अस्पताल तक पहुंचने से पहले विशेषज्ञ चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकता है। इससे आपात स्थिति में समय की बचत और मरीज की स्थिति के अनुसार अस्पताल में पहले से तैयारी करने की संभावना भी बढ़ेगी।
तेलंगाना के अनुभव से उत्तराखंड को यह समझने में मदद मिल सकती है कि 5जी जैसी संचार तकनीक का इस्तेमाल पर्वतीय क्षेत्रों की आपात स्वास्थ्य सेवाओं में किस तरह किया जा सकता है। फिलहाल इसे उत्तराखंड के लिए एक संभावित मॉडल के रूप में देखा जा रहा है, जिसे राज्य की भौगोलिक और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के अनुसार विकसित किया जा सकता है।




