
रुद्रप्रयाग। हेमकुंड साहिब यात्रा मार्ग पर स्थित नगरासू गुरुद्वारे में हुए विवाद ने पूरे क्षेत्र में चिंता और चर्चा का माहौल पैदा कर दिया है। शनिवार तक सामान्य दिखाई देने वाले हालात अचानक तनावपूर्ण हो गए, जब तीर्थयात्री के रूप में पहुंचे सात निहंग गुरुद्वारे की छत पर चढ़ गए और प्रबंधन के साथ टकराव की स्थिति उत्पन्न हो गई। इस घटनाक्रम ने न केवल स्थानीय लोगों को हैरान किया बल्कि सुरक्षा और खुफिया तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार सात निहंग तीन दिन पहले नगरासू पहुंचे थे। इस दौरान वे अन्य श्रद्धालुओं की तरह गुरुद्वारे में रह रहे थे और सेवा कार्यों में भी भाग ले रहे थे। गुरुद्वारा प्रबंधन के साथ उनकी कई दौर की बातचीत भी हुई। बताया जा रहा है कि वे अपने साथ बड़ी संख्या में लोगों को गुरुद्वारे में ठहराने की मांग कर रहे थे। जब इस मांग पर सहमति नहीं बन पाई तो धीरे-धीरे विवाद बढ़ता गया और अंततः तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शनिवार सुबह तक किसी को इस बात का अंदाजा नहीं था कि स्थिति इतनी गंभीर हो जाएगी। शाम होते-होते निहंगों के छत पर चढ़ने की खबर फैल गई, जिसके बाद पूरे इलाके में बेचैनी का माहौल बन गया। गुरुद्वारे के आसपास रहने वाले लोगों ने सुरक्षा को लेकर चिंता जताई और प्रशासन से शीघ्र समाधान की मांग की।
गुरुद्वारे के निकट रहने वाली रजनी देवी ने बताया कि वर्ष 2007-08 में भी यहां एक विवाद हुआ था, लेकिन उस समय हालात इतने तनावपूर्ण नहीं बने थे। उनका कहना है कि इस बार की घटना ने स्थानीय लोगों को असहज कर दिया है क्योंकि जिन लोगों को श्रद्धालु और सेवादार समझा जा रहा था, वही अचानक टकराव का कारण बन गए।
गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रबंधक बाबा बेहंत सिंह के अनुसार निहंग अपने साथियों की रिहाई की मांग पर अड़े हुए हैं। उन्होंने बताया कि विवाद के दौरान दो लोगों को बंधक बनाया गया था। इनमें से एक को शनिवार देर रात छोड़ दिया गया, जबकि एक सेवादार के अब भी उनके कब्जे में होने की बात कही जा रही है। कई दौर की वार्ताओं के बावजूद कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है।
विवाद का असर गुरुद्वारे की नियमित धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों पर भी पड़ा है। सामान्य दिनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां लंगर प्रसाद ग्रहण करते हैं, लेकिन तनाव के कारण श्रद्धालुओं की आवाजाही प्रभावित हुई। तैयार किया गया भोजन भी पूरी तरह उपयोग में नहीं आ सका। इससे गुरुद्वारे की व्यवस्थाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।
घटना का सबसे चिंताजनक पहलू गुरुद्वारे की छत पर जमा किए गए ईंट-पत्थर और अन्य नुकीली वस्तुएं हैं। पुलिस अधिकारियों ने भी इस बात की पुष्टि की है कि छत पर ऐसे सामान मौजूद हैं, जिन्हें किसी भी अप्रिय स्थिति में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसी कारण पुलिस, आईटीबीपी और अन्य सुरक्षा एजेंसियां लगातार निगरानी बनाए हुए हैं।
क्षेत्र पंचायत सदस्य सतीश राणा ने कहा कि नगरासू में इस प्रकार की घटना पहली बार देखने को मिली है। उन्होंने कहा कि इससे स्थानीय लोगों में भय और असुरक्षा की भावना पैदा हुई है। लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन और संबंधित पक्षों के बीच बातचीत के माध्यम से जल्द समाधान निकाला जाएगा और क्षेत्र में सामान्य स्थिति बहाल होगी।
विवाद के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है। चमोली और अल्मोड़ा जिलों की सीमा से जुड़े संवेदनशील क्षेत्रों पाडुंवाखाल, नागचूलाखाल और माईथान में पुलिस और प्रशासन ने चौकसी बढ़ा दी है। एसडीएम, तहसील प्रशासन, पुलिस और आईटीबीपी की टीमें लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
इस पूरे घटनाक्रम ने सबसे बड़ा सवाल खुफिया तंत्र की सक्रियता को लेकर खड़ा किया है। कर्णप्रयाग में 16 जून को हुए विवाद के बाद भी यदि संबंधित लोगों की गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी रखी जाती तो संभवतः नगरासू में यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती। तीन दिनों तक गुरुद्वारे में रहकर रणनीति बनाने की बात सामने आने के बाद यह प्रश्न और भी महत्वपूर्ण हो गया है कि सुरक्षा एजेंसियों को इसकी जानकारी समय रहते क्यों नहीं मिली।
फिलहाल प्रशासन, पुलिस और गुरुद्वारा प्रबंधन स्थिति को सामान्य बनाने के प्रयासों में जुटे हैं। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि वार्ता के माध्यम से विवाद का समाधान कब निकलता है और नगरासू में सामान्य धार्मिक एवं सामाजिक गतिविधियां कब पूरी तरह बहाल होती हैं।




