
गाजीपुर। जिले में बिजली विभाग की कार्रवाई और बकाया बिल के दबाव से जुड़ा एक मामला अब प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर गंभीर रूप ले चुका है। मुरादचक निवासी दुकानदार सुरेंद्र कश्यप की आत्महत्या के मामले में पुलिस ने विजिलेंस विभाग के जूनियर इंजीनियर (जेई) दीपक कुमार, उपनिरीक्षक (एसआई) उदयभान और हेड कांस्टेबल कैलाश भारती के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है। मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया है कि अधिकारियों की ओर से लगातार की गई कार्रवाई और मानसिक दबाव के कारण सुरेंद्र कश्यप ने आत्मघाती कदम उठाया।
सैदपुर कोतवाली पुलिस के अनुसार, मृतक के पुत्र शुभम कश्यप ने तहरीर देकर बताया कि वर्ष 2025 के सितंबर-अक्तूबर माह में विजिलेंस टीम उनके घर पहुंची थी। टीम ने बिजली कनेक्शन की जांच करते हुए कथित रूप से अनियमित उपयोग का आरोप लगाया और लगभग 65 हजार रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया। इसके साथ ही सुरेंद्र कश्यप को नोटिस भी दिया गया था। परिवार का कहना है कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह यह राशि जमा नहीं कर सके।
आरोप है कि जुर्माने की राशि जमा न होने पर बाद में कुल 1.12 लाख रुपये से अधिक की राजस्व वसूली (आरसी) जारी कर दी गई। इसके बाद वसूली के लिए लगातार दबाव बनाया जाने लगा। परिजनों के मुताबिक तहसील से जुड़े कर्मचारी और संबंधित अधिकारी बार-बार घर पहुंचते थे, जिससे सुरेंद्र कश्यप मानसिक रूप से बेहद परेशान रहने लगे थे। परिवार का दावा है कि इसी तनाव और प्रताड़ना के चलते उन्होंने 15 जून की सुबह विषाक्त पदार्थ का सेवन कर लिया। हालत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने मृतक के पुत्र की शिकायत पर जेई दीपक कुमार, एसआई उदयभान और हेड कांस्टेबल कैलाश भारती के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कर लिया है। साथ ही कुछ अन्य अज्ञात व्यक्तियों को भी जांच के दायरे में रखा गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की सभी पहलुओं से जांच की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला सामने आने के बाद शासन स्तर पर भी सक्रियता दिखाई गई। जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला स्वयं पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे और पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। प्रशासन की ओर से मृतक के परिवार को तत्काल एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई है। साथ ही मृतक की दो नाबालिग बेटियों की शिक्षा और भरण-पोषण में हरसंभव मदद का आश्वासन दिया गया है। प्रशासन ने यह भी संकेत दिया है कि अन्य सरकारी योजनाओं के माध्यम से परिवार को अतिरिक्त सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
प्रारंभिक जांच में वसूली प्रक्रिया के दौरान दबाव बनाए जाने की बात सामने आने पर जिला प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए सैदपुर तहसील में तैनात अमीन संतोष को निलंबित कर दिया है। प्रशासन का कहना है कि यदि जांच में अन्य अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई जाती है तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
घटना के बाद जिला प्रशासन ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। जिलाधिकारी ने बिजली निगम को आदेश दिया है कि एक से तीन किलोवाट तक के घरेलू उपभोक्ताओं के यहां बिना सक्षम मजिस्ट्रेट की अनुमति के विजिलेंस जांच नहीं की जाएगी। प्रशासन का मानना है कि छोटे उपभोक्ताओं के खिलाफ की जाने वाली कार्रवाई में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
फिलहाल पुलिस मामले की गहन जांच में जुटी है और संबंधित अधिकारियों से पूछताछ की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। जिले में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग जांच के निष्कर्ष का इंतजार कर रहे हैं।







