
आजमगढ़: यूपीएसएसएससी प्राविधिक सहायक ग्रुप-सी की मुख्य परीक्षा में नकल कराने की साजिश का पुलिस ने खुलासा किया है। अभ्यर्थी को परीक्षा में पास कराने के लिए छह लाख रुपये में सौदा तय किए जाने की बात सामने आई है। परीक्षा के दौरान अभ्यर्थी के कान के अंदर हियरिंग डिवाइस और अंडरवियर में सिम व दो सेल बैटरी लगा ब्लूटूथ डिवाइस मिलने के बाद मामले की जांच शुरू हुई। पुलिस ने अब नकल गिरोह के एक सदस्य वीरेंद्र कुमार राय उर्फ बाबू को गिरफ्तार किया है।
मामला आजमगढ़ के शिब्ली नेशनल इंटर कॉलेज में नौ अगस्त को आयोजित यूपीएसएसएससी प्राविधिक सहायक ग्रुप-सी की मुख्य परीक्षा से जुड़ा है। परीक्षा के दौरान ब्लॉक-ए के एक कक्ष में वाराणसी के जंसा थाना क्षेत्र के भड़ाव गांव निवासी आलोक पटेल की गतिविधियां संदिग्ध नजर आई थीं। संदेह होने पर उसकी तलाशी ली गई तो उसके पास से नकल कराने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद हुए।
तलाशी के दौरान आलोक के कान के अंदर हियरिंग डिवाइस मिला। इसके अलावा उसके अंडरवियर में सिम और दो सेल बैटरी लगा ब्लूटूथ डिवाइस भी बरामद किया गया। पुलिस को आशंका हुई कि इन उपकरणों के जरिये परीक्षा केंद्र के बाहर मौजूद लोगों से संपर्क कर प्रश्नों के उत्तर हासिल करने की तैयारी थी।
पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए आलोक पटेल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। पूछताछ और विवेचना के दौरान नकल कराने वाले गिरोह से जुड़े अन्य लोगों के नाम सामने आए। इसी जांच के आधार पर पुलिस ने वाराणसी के जंसा थाना क्षेत्र के कुरौना सरौनी गांव निवासी वीरेंद्र कुमार राय उर्फ बाबू को भी मामले में आरोपी बनाया।
पुलिस के अनुसार, वीरेंद्र ने पूछताछ में बताया कि उसने अभ्यर्थी को परीक्षा में बाहर से उत्तर बताकर पास कराने के लिए उपकरण उपलब्ध कराए थे। जांच में यह भी सामने आया कि अभ्यर्थी को प्राविधिक सहायक की मुख्य परीक्षा में पास कराने के लिए छह लाख रुपये में सौदा तय किया गया था। डिवाइस उपलब्ध कराने के बदले 15 हजार रुपये एडवांस लिए जाने की बात भी पूछताछ में सामने आई है।
पुलिस के अनुसार, वीरेंद्र कुमार राय ने अपने साथियों आनंद पटेल और कुश पटेल, दोनों निवासी वाराणसी, के साथ मिलकर परीक्षा में अभ्यर्थियों को पास कराने की व्यवस्था करने वाले लोगों से संपर्क किया था। पुलिस अब इन लोगों की भूमिका और गिरोह के नेटवर्क के बारे में भी जानकारी जुटा रही है।
वीरेंद्र को पुलिस ने मंगलवार को आजमगढ़ के प्राइवेट बस अड्डे से गिरफ्तार किया। उसके कब्जे से मोबाइल फोन भी बरामद किया गया है। पुलिस मोबाइल और अन्य साक्ष्यों के आधार पर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपी किन-किन लोगों के संपर्क में था और परीक्षा में नकल कराने का पूरा नेटवर्क किस तरह संचालित किया जा रहा था।
इस मामले में आजमगढ़ कोतवाली में धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र, सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम और आईटी एक्ट की संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस अब मामले में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश और उनकी भूमिका की जांच कर रही है।
वाराणसी में भी दर्ज है प्राथमिकी
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपी वीरेंद्र कुमार राय उर्फ बाबू के खिलाफ वाराणसी के फूलपुर थाने में वर्ष 2021 में भी प्राथमिकी दर्ज है। अब आजमगढ़ के मामले में उसकी गिरफ्तारी के बाद पुलिस उसके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड और नकल गिरोह से संभावित संबंधों की भी जांच कर रही है।
शहर कोतवाल यादवेंद्र पांडेय के अनुसार, मामले की विवेचना जारी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि नकल गिरोह में और कौन-कौन लोग शामिल हैं, अभ्यर्थियों से संपर्क कैसे किया जाता था और परीक्षा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जरिये नकल कराने की व्यवस्था किस स्तर तक फैली हुई थी।
प्राविधिक सहायक ग्रुप-सी की मुख्य परीक्षा में इस तरह इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के इस्तेमाल का मामला सामने आने के बाद परीक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठे हैं। फिलहाल पुलिस ने एक अभ्यर्थी और गिरोह के एक सदस्य को गिरफ्तार कर लिया है तथा अन्य संदिग्धों की भूमिका की जांच की जा रही है।







