
देहरादून। आगामी उत्तराखंड विधानसभा चुनाव को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी ने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और जनसंपर्क अभियान को गति देने के लिए व्यापक रणनीति तैयार की है। इसी क्रम में पार्टी ने प्रदेश के प्रत्येक सांसद, मंत्री और विधायक को एक-एक विधानसभा क्षेत्र में 24 घंटे का प्रवास करने की जिम्मेदारी सौंपी है। बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में इस रणनीति को अंतिम रूप दिया गया। बैठक में उत्तराखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट सहित केंद्रीय और प्रदेश स्तर के वरिष्ठ नेताओं ने भाग लिया तथा चुनावी तैयारियों की विस्तार से समीक्षा की गई।
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि भाजपा की कोर कमेटी के सभी 17 सदस्य, जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री, सांसद और अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हैं, वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी द्वारा गंवाई गई 23 सीटों पर विशेष फोकस करेंगे। इन नेताओं को संबंधित विधानसभा क्षेत्रों में 24 घंटे का प्रवास कर संगठनात्मक गतिविधियों की निगरानी, कार्यकर्ताओं से संवाद तथा स्थानीय जनभावनाओं का आकलन करने की जिम्मेदारी दी जाएगी। वहीं शेष विधानसभा क्षेत्रों में मंत्री और विधायक इसी प्रकार का प्रवास कार्यक्रम संचालित करेंगे। कुछ सांसदों को उनकी संगठनात्मक क्षमता और क्षेत्रीय अनुभव के आधार पर दो से तीन विधानसभा क्षेत्रों की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी सौंपी जा सकती है।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के हालिया उत्तराखंड दौरे के बाद संगठनात्मक गतिविधियों में तेजी देखने को मिल रही है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि चुनावी सफलता के लिए केवल बड़े कार्यक्रम पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि बूथ और शक्ति केंद्र स्तर पर मजबूत नेटवर्क तैयार करना भी उतना ही आवश्यक है। इसी सोच के तहत प्रत्येक प्रवास कार्यक्रम में स्थानीय कार्यकर्ताओं, शक्ति केंद्र प्रभारियों और बूथ पदाधिकारियों के साथ बैठकें आयोजित की जाएंगी। नेताओं को क्षेत्रीय समस्याओं, विकास कार्यों और जन अपेक्षाओं की प्रत्यक्ष जानकारी जुटाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
भाजपा ने अपने इस विशेष अभियान में सामाजिक और पर्यावरणीय सरोकारों को भी शामिल किया है। पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि प्रत्येक प्रवास कार्यक्रम के दौरान स्वच्छता अभियान और वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन अनिवार्य होगा। इससे एक ओर सामाजिक संदेश जाएगा तो दूसरी ओर कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी भी सुनिश्चित होगी। नेताओं को स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों को भी इन अभियानों से जोड़ने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रदेश भाजपा संगठन के अनुसार वर्तमान में उत्तराखंड में 2835 शक्ति केंद्र कार्यरत हैं। शक्ति केंद्र भाजपा के संगठनात्मक ढांचे की एक महत्वपूर्ण इकाई माने जाते हैं, जो तीन से पांच मतदान केंद्रों के समूह से मिलकर बनते हैं। यह इकाई मंडल और बूथ स्तर के बीच समन्वय स्थापित करने का कार्य करती है। पार्टी का मानना है कि शक्ति केंद्रों की सक्रियता से न केवल संगठनात्मक मजबूती बढ़ेगी, बल्कि चुनावी प्रबंधन, मतदाता संपर्क और बूथ संचालन भी अधिक प्रभावी बन सकेगा।
दिल्ली बैठक में यह भी तय किया गया कि सभी नेताओं को अपने प्रवास कार्यक्रमों की विस्तृत रिपोर्ट संगठन को सौंपनी होगी। इन रिपोर्टों के आधार पर प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र की राजनीतिक स्थिति, संगठन की सक्रियता और चुनावी संभावनाओं का मूल्यांकन किया जाएगा। इसके साथ ही आगामी रणनीति तैयार करने में भी इन फीडबैक रिपोर्टों का उपयोग किया जाएगा।
उधर भाजपा के संगठनात्मक ढांचे में भी हाल ही में महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है। केंद्रीय नेतृत्व द्वारा महामंत्री संगठन अजय कुमार को राजस्थान भेजे जाने के बाद उत्तराखंड में यह पद रिक्त हो गया है। फिलहाल पार्टी ने प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट को ही महामंत्री संगठन का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है। अब वे प्रदेश अध्यक्ष के साथ-साथ संगठनात्मक गतिविधियों के संचालन और चुनावी तैयारियों की निगरानी की जिम्मेदारी भी संभालेंगे।
इसके अतिरिक्त भाजपा पांच जून को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पूरे प्रदेश में व्यापक वृक्षारोपण अभियान चलाने जा रही है। जिलों, मंडलों और शक्ति केंद्र स्तर तक आयोजित होने वाले इस अभियान में पार्टी पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में भाग लेंगे। पार्टी नेतृत्व का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के साथ-साथ संगठनात्मक सक्रियता को भी बढ़ावा देना है। भाजपा का मानना है कि ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से कार्यकर्ताओं का जनता से सीधा संवाद मजबूत होगा और चुनावी तैयारियों को भी नई गति मिलेगी।




