
देहरादून: उत्तराखंड में लगातार बढ़ रही ठोस कचरे की समस्या से निपटने के लिए राज्य सरकार अब नया वित्तीय मॉडल तैयार करने जा रही है। प्रदेश के शहरी क्षेत्रों और पर्वतीय नगरों में कचरा प्रबंधन को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से शराब की प्रत्येक बोतल पर एक रुपये का अतिरिक्त सेस लगाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। शहरी विकास विभाग की ओर से तैयार इस प्रस्ताव को जल्द मुख्य सचिव के समक्ष रखा जाएगा। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से नगर निकायों को स्थायी आर्थिक संसाधन मिल सकेंगे और कचरा प्रबंधन की वर्तमान चुनौतियों से प्रभावी तरीके से निपटा जा सकेगा।
प्रदेश में वर्तमान समय में रोजाना 2100 टन से अधिक ठोस अपशिष्ट निकल रहा है। तेजी से बढ़ती आबादी, पर्यटन गतिविधियों और शहरीकरण के कारण कचरे का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। मैदानी क्षेत्रों में जहां संसाधनों और आधुनिक मशीनों की कमी चुनौती बनी हुई है, वहीं पर्वतीय क्षेत्रों में कचरा एकत्र करने, ढुलाई और निस्तारण की प्रक्रिया बेहद कठिन और खर्चीली साबित हो रही है। यही कारण है कि राज्य के अधिकांश नगर निकायों में वैज्ञानिक तरीके से कचरा निस्तारण की व्यवस्था अब तक पूरी तरह विकसित नहीं हो पाई है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में इस समय 60 से अधिक डंपिंग साइट मौजूद हैं, जहां करीब 23 लाख मीट्रिक टन पुराना कचरा जमा है। इनमें से कई स्थानों पर पर्यावरणीय खतरे भी बढ़ने लगे हैं। कचरे के ढेरों से दुर्गंध, प्रदूषण और भूजल प्रभावित होने जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। वर्तमान में राज्य में कुल ठोस अपशिष्ट का केवल 40 से 45 प्रतिशत हिस्सा ही वैज्ञानिक ढंग से प्रबंधित किया जा पा रहा है, जबकि बाकी कचरा खुले डंपिंग क्षेत्रों में जमा होता जा रहा है।
शहरी विकास विभाग का कहना है कि नए सेस से प्राप्त होने वाली राशि को सीधे नगर निकायों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने में खर्च किया जाएगा। इसमें कचरा संग्रहण, परिवहन, छंटाई, प्रोसेसिंग और वैज्ञानिक निस्तारण की योजनाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। विभाग की योजना है कि निकायों को नियमित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर सफाई व्यवस्था को अधिक प्रभावी और स्थायी बनाया जाए।
सचिव शहरी विकास नितेश कुमार झा ने बताया कि निकायों में कचरा प्रबंधन के लिए रोजमर्रा के संचालन खर्च और संसाधनों की भारी आवश्यकता रहती है। इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग ने शराब की बोतलों पर अतिरिक्त सॉलिड वेस्ट सेस लगाने का प्रस्ताव तैयार किया है। उन्होंने कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य प्रदेश में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था को अधिक मजबूत और व्यवस्थित बनाना है।
गौरतलब है कि उत्तराखंड सरकार पहले से ही शराब की प्रत्येक बोतल पर तीन रुपये अतिरिक्त शुल्क वसूल रही है। इसमें एक रुपया गो सेवा, एक रुपया महिला कल्याण और एक रुपया खेल गतिविधियों के लिए उपयोग किया जाता है। अब प्रस्तावित नया सेस लागू होने पर यह अतिरिक्त शुल्क बढ़कर चार रुपये हो जाएगा। सरकार को उम्मीद है कि इससे मिलने वाली आय से कचरा प्रबंधन परियोजनाओं को नई गति मिलेगी और नगर निकायों को वित्तीय संकट से राहत मिल सकेगी।




