
टिहरी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित टिहरी दौरे को लेकर उत्तराखंड में राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। टिहरी झील किनारे कोटीकॉलोनी में प्रस्तावित बड़ी जनसभा के साथ-साथ साहसिक पर्यटन से जुड़े कार्यक्रमों की भी व्यापक चर्चा हो रही है। संभावना जताई जा रही है कि प्रधानमंत्री टिहरी झील में कोटीकॉलोनी से डोबरा-चांठी तक बोटिंग कर सकते हैं, जिससे टिहरी को राष्ट्रीय स्तर पर पर्यटन हब के रूप में नई पहचान मिल सकती है।
प्रधानमंत्री के संभावित कार्यक्रम को देखते हुए प्रशासन, टीएचडीसी और सुरक्षा एजेंसियों ने तैयारियां तेज कर दी हैं। बृहस्पतिवार को टीएचडीसी के मुख्य महाप्रबंधक आरआर सेमवाल, एएसपी दीपक सिंह, एसडीएम कमलेश मेहता और जिला पर्यटन अधिकारी सोबत सिंह राणा ने कोटीकॉलोनी क्षेत्र का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। अधिकारियों ने टिहरी झील में संचालित क्रूज और बार्ज बोट का निरीक्षण कर सुरक्षा और संचालन व्यवस्थाओं की समीक्षा भी की।
एसडीआरएफ की टीम ने भी झील क्षेत्र में सुरक्षा इंतजामों का परीक्षण किया। सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री कुछ समय के लिए झील में संचालित क्रूज बोट में रुक सकते हैं। इसके अलावा कोटीकॉलोनी के आसपास किसी होमस्टे में अल्प प्रवास की संभावनाओं को देखते हुए प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां उपयुक्त स्थानों का चयन कर रही हैं। सुरक्षा मानकों के अनुरूप होमस्टे चिह्नित करने की प्रक्रिया जारी है।
प्रधानमंत्री का यह दौरा टिहरी बांध की 1000 मेगावाट क्षमता वाली पंप स्टोरेज प्लांट (पीएसपी) परियोजना के लोकार्पण से भी जुड़ा माना जा रहा है। करीब आठ हजार करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह परियोजना देश की पहली वेरिएबल स्पीड पंप स्टोरेज परियोजना है। इसके शुरू होने के बाद टिहरी बांध की कुल बिजली उत्पादन क्षमता 2400 मेगावाट तक पहुंच जाएगी, जिससे राज्य और देश की ऊर्जा जरूरतों को मजबूती मिलेगी।
प्रधानमंत्री के संभावित दौरे से स्थानीय लोगों की उम्मीदें भी बढ़ गई हैं। बांध प्रभावित परिवार लंबे समय से पुनर्वास, रायल्टी और क्षेत्रीय विकास से जुड़े मुद्दों के समाधान की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा प्रतापनगर क्षेत्र के फिकवाल समुदाय को केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल किए जाने की मांग भी जोर पकड़ रही है। लोगों को उम्मीद है कि प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान इन मुद्दों पर सकारात्मक घोषणाएं हो सकती हैं।
राजनीतिक दृष्टि से भी टिहरी की प्रस्तावित जनसभा को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अगले वर्ष उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं और टिहरी-उत्तरकाशी क्षेत्र की नौ विधानसभा सीटों में से सात पर भाजपा का कब्जा है। प्रतापनगर सीट कांग्रेस और यमुनोत्री सीट निर्दलीय विधायक के पास है। ऐसे में प्रधानमंत्री की यह जनसभा आगामी चुनावों से पहले भाजपा के लिए बड़ा राजनीतिक संदेश मानी जा रही है।




