
हल्द्वानी/देहरादून। उत्तराखंड के विभिन्न जनपदों में सक्रिय पत्रकारों की हाल ही में रद्द की गई मान्यता को लेकर पत्रकार समुदाय में असंतोष का माहौल लगातार गहराता जा रहा है। इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए पर्वतीय पत्रकार संगठन ने महानिदेशक सूचना के माध्यम से प्रदेश के मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन भेजा है, जिसमें मान्यता निरस्त किए जाने के मामलों की पुनः समीक्षा करने की मांग की गई है।
पर्वतीय पत्रकार संगठन के अध्यक्ष सुरेश पाठक ने अपने पत्र में कहा है कि उत्तराखंड के पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों में कार्यरत पत्रकार सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सामने लाने का महत्वपूर्ण कार्य करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई पत्रकार वर्षों से सक्रिय रूप से पत्रकारिता कर रहे थे और उन्हें शासन द्वारा मान्यता भी प्राप्त थी, लेकिन हाल ही में उनकी मान्यता अचानक समाप्त कर दिए जाने से पत्रकारों में असमंजस और चिंता की स्थिति पैदा हो गई है।
संगठन के अनुसार पत्रकारिता की गरिमा और विश्वसनीयता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। यदि किसी पत्रकार के विरुद्ध कोई गंभीर आपराधिक मामला लंबित हो या उसके कार्यों को लेकर गंभीर शिकायतें हों, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। किंतु संगठन का कहना है कि अनेक पत्रकारों की मान्यता केवल एलआईयू (लोकल इंटेलिजेंस यूनिट) की रिपोर्ट के आधार पर समाप्त कर दी गई है, जिसमें यह उल्लेख किया गया है कि वे विज्ञापन से संबंधित कार्य भी करते हैं।
संगठन का तर्क है कि पर्वतीय क्षेत्रों और छोटे नगरों की सामाजिक व आर्थिक परिस्थितियां बड़े शहरों से अलग होती हैं। यहां पत्रकारिता के संसाधन सीमित होते हैं और कई बार पत्रकारों को आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में केवल इस आधार पर कि कोई पत्रकार विज्ञापन से जुड़ा कार्य करता है, उसकी मान्यता समाप्त कर देना उचित नहीं माना जा सकता।
पर्वतीय पत्रकार संगठन का यह भी कहना है कि पत्रकार लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माने जाते हैं और उनकी निष्पक्ष तथा निर्भीक भूमिका समाज में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनहित के मुद्दों को सामने लाने में अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यदि पत्रकारों के साथ इस प्रकार की कार्रवाई बिना व्यापक समीक्षा के की जाती है तो इससे न केवल पत्रकारों का मनोबल प्रभावित होता है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में पत्रकारिता की भूमिका भी कमजोर पड़ सकती है।
संगठन ने महानिदेशक सूचना से अनुरोध किया है कि इस पूरे प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए रद्द की गई पत्रकार मान्यता के मामलों की दोबारा समीक्षा कराई जाए। साथ ही जिन पत्रकारों के विरुद्ध कोई गंभीर आपराधिक मामला या ठोस शिकायत नहीं है, उनकी मान्यता को पुनः बहाल करने पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाए। पर्वतीय पत्रकार संगठन का मानना है कि यदि सरकार इस विषय पर सकारात्मक कदम उठाती है तो इससे पत्रकार समुदाय में विश्वास कायम होगा और प्रदेश में पत्रकारिता की स्वतंत्र एवं जिम्मेदार भूमिका को और मजबूती मिलेगी।






