देहरादून ( उत्तराखंड)शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, मालदेवता में बौद्धिक संपदा अधिकारों (आईपीआर) को लेकर जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई। महाविद्यालय की आईपीआर सेल द्वारा दिनांक 23 जनवरी 2026 को “नवाचार एवं आर्थिक विकास में बौद्धिक संपदा अधिकारों की भूमिका” विषय पर एक व्याख्यान श्रृंखला का सफल आयोजन ऑनलाइन माध्यम से किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं शोधार्थियों को बौद्धिक संपदा अधिकारों की अवधारणा, उपयोगिता और वैश्विक परिप्रेक्ष्य में इसकी बढ़ती महत्ता से परिचित कराना था।

कार्यक्रम का शुभारंभ कार्यक्रम समन्वयक कविता कला द्वारा माननीय प्राचार्य एवं मुख्य अतिथि वक्ता के स्वागत के साथ किया गया। उद्घाटन सत्र में प्राचार्य महोदय एवं आईपीआर टीम के सदस्यों द्वारा माँ सरस्वती के स्वरूप में दीप प्रज्ज्वलित किया गया, जो ज्ञान, सृजनशीलता और बौद्धिक विकास का प्रतीक है।
आईपीआर सेल की सदस्य डॉ. श्रुति चौकियाल ने मुख्य वक्ता का परिचय देते हुए बताया कि डॉ. अमादुद्दीन अहमद, श्री राधेहरि पीजी कॉलेज, काशीपुर में अर्थशास्त्र के प्राध्यापक हैं।और बौद्धिक संपदा, नवाचार एवं आर्थिक विकास के क्षेत्र में उनका उल्लेखनीय अकादमिक योगदान रहा है।
आईपीआर सेल की सह-समन्वयक डॉ. डिंपल भट्ट ने कहा कि वर्तमान डिजिटल और नवाचार-प्रधान युग में ऐसी व्याख्यान श्रृंखलाएँ विद्यार्थियों और शिक्षाविदों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। उन्होंने बताया कि शोध कार्य, प्रोजेक्ट्स, स्टार्टअप विचारों और डिजिटल कंटेंट की सुरक्षा के लिए आईपीआर की समझ आज अनिवार्य हो चुकी है। कार्यक्रम के समापन पर माननीय प्राचार्य प्रो. वी. पी. अग्रवाल ने विषय की प्रासंगिकता की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक कार्यक्रम विद्यार्थियों को नवाचार, आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करते हैं। डॉ. अनीता चौहान ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए वक्ता और आयोजन टीम के योगदान की सराहना की।
कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. लीना रावत, डॉ. सुमन गुसाईं, डॉ. कपिल सेमवाल, डॉ. विनोद शाह और डॉ. रेखा चमोली का तकनीकी सहयोग उल्लेखनीय एवं सराहनीय रहा। व्याख्यान श्रृंखला में कुल 50 प्रतिभागियों ने ऑनलाइन एवं ऑफलाइन माध्यम से सहभागिता की।





