
देहरादून। नगर निगम देहरादून में महापौर कोटे से कराए जाने वाले विकास कार्यों में डुप्लीकेसी रोकने के लिए प्रशासन ने जांच की रफ्तार तेज कर दी है। प्रारंभिक जांच में अब तक छह ऐसे विकास कार्य सामने आए हैं, जो पहले से अन्य विभागों या योजनाओं में स्वीकृत पाए गए, जिसके चलते इन्हें टेंडर प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया है। नगर निगम प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि किसी भी कार्य का वर्कऑर्डर जारी करने से पहले उसकी तकनीकी और प्रशासनिक जांच अनिवार्य की गई है। डुप्लीकेसी से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जांच के साथ-साथ वार्डों से लगातार नए-नए प्रस्ताव भी सामने आ रहे हैं। इनमें से अधिकांश प्रस्ताव सीमा विस्तार में शामिल नए वार्डों से जुड़े हुए हैं। नगर निगम का लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) अनुभाग पुराने प्रस्तावों की जांच के साथ-साथ नए प्रस्तावों को भी रिकॉर्ड में शामिल कर रहा है। प्रशासन का कहना है कि नए प्रस्ताव तभी आगामी टेंडर प्रक्रिया में जोड़े जाएंगे, जब यह स्पष्ट हो जाएगा कि संबंधित कार्य पहले से किसी अन्य विभाग—जैसे एमडीडीए या लोनिवि—द्वारा कराए नहीं गए हैं।
नगर निगम से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, इसी सप्ताह टेंडर खोलने की तैयारी है। आगामी आठ जनवरी को टेंडर आवेदन बॉक्स में डाले जाएंगे, जिसके बाद आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। फिलहाल सभी प्रस्तावों के तकनीकी पहलुओं का गहन अध्ययन किया जा रहा है। महापौर सौरभ थपलियाल ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि टेंडर प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता और कड़ी जांच सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी तरह का डुप्लीकेट या अनावश्यक कार्य शामिल न हो सके। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में गुणवत्ता और निष्पक्षता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
इस बीच शहर में पहले से स्वीकृत विकास कार्यों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। पूर्व में प्रत्येक वार्ड के लिए 30-30 लाख रुपये का बजट स्वीकृत किया गया था। इसके बाद वर्षाकाल में गड्ढे भरने के लिए हर वार्ड को पांच-पांच लाख रुपये अतिरिक्त दिए गए। इसके अलावा, विकास कार्यों के तहत प्रत्येक वार्ड में 15-15 लाख रुपये के और कार्य स्वीकृत किए गए। अब चर्चा इस बात की हो रही है कि गड्ढे भरने के लिए स्वीकृत राशि वास्तव में पूरी खर्च हुई या नहीं, और जिन स्थानों पर कार्य किए गए, वहां काम की गुणवत्ता की निगरानी हुई या नहीं।
यह भी सवाल उठ रहा है कि इन कार्यों से संबंधित निरीक्षण रिपोर्ट नगर निगम प्रशासन द्वारा महापौर और नगर आयुक्त को सौंपी गई या नहीं। ऐसे में अब यह देखना अहम होगा कि जांच के दायरे में पुराने कार्य भी आते हैं या नहीं।




