
देहरादून। उत्तराखंड के न्यायालयों में कार्यवाही को अधिक सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। अब अधिवक्ता और वादी-प्रतिवादी केस की भारी-भरकम हार्ड फाइलों के बजाय डिजिटल फाइलों का निरीक्षण कर सकेंगे। इसके लिए शासन ने आवश्यक बजट जारी कर दिया है।
प्रदेश के सभी जिला न्यायालयों में न्यायिक अभिलेखों के ई-निरीक्षण की सुविधा शुरू की जाएगी। प्रमुख सचिव न्याय एवं विधि परामर्शी प्रशांत जोशी की ओर से इस योजना के लिए 38.50 लाख रुपये की प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति देते हुए बजट जारी किया गया है। यह राशि उच्च न्यायालय नैनीताल के महानिबंधक को उपलब्ध कराई गई है।
🔸 22 कियोस्क मशीनें होंगी स्थापित
जारी बजट से प्रदेशभर के जिला न्यायालयों में कुल 22 कियोस्क मशीनें लगाई जाएंगी। देहरादून जैसे अधिक मुकदमों वाले जिलों में मशीनों की संख्या ज्यादा होगी, जबकि अन्य जिलों में आवश्यकता के अनुसार कियोस्क लगाए जाएंगे। इन मशीनों के माध्यम से अधिवक्ता और पक्षकार केस नंबर डालकर डिजिटल फाइल देख सकेंगे।
🔸 रिकॉर्ड रूम का दबाव होगा कम
वर्तमान में प्रत्येक तारीख पर रिकॉर्ड रूम से केस फाइल निकालना और उनका निरीक्षण करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। जैसे-जैसे मामला आगे बढ़ता है, फाइलें भी भारी हो जाती हैं। डिजिटल व्यवस्था लागू होने से रिकॉर्ड रूम पर दबाव कम होगा और न्यायिक प्रक्रिया अधिक सुगम बनेगी।
🔸 डिजिटल कॉपी देने की भी तैयारी
भविष्य में केस से संबंधित सत्यापित प्रतियां भी डिजिटल फॉर्म में उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है। इससे अधिवक्ताओं, वादियों और प्रतिवादियों का समय बचेगा और न्यायालयीन कार्यों में तेजी आएगी।
🔐 सुरक्षा पर भी जोर
सरकार ने डिजिटल रिकॉर्ड की सुरक्षा को लेकर भी विशेष ध्यान दिया है। एनआईसी द्वारा तैयार विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) के अनुसार साइबर सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी। टेंडर प्रक्रिया में यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि उपकरण बाय-बैक मोड या ई-वेस्ट प्रबंधन सेवा से जुड़े हों, ताकि ई-वेस्ट और पर्यावरण प्रदूषण से बचाव किया जा सके।




