
देहरादून। रेलवे भर्ती बोर्ड की कंप्यूटर-आधारित परीक्षा में नकल के एक गंभीर मामले का खुलासा तब हुआ, जब देहरादून के साहिबाबाद रोड स्थित आईकैट सॉल्यूशन परीक्षा केंद्र में एक अभ्यर्थी की संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी रखी गई। जांच में मिले सुरागों और बरामद सामग्री ने यह साफ कर दिया कि यह सिर्फ साधारण नकल का प्रयास नहीं था, बल्कि एक संगठित गैंग सक्रिय रूप से इस प्रकरण के पीछे काम कर रहा था, जो प्राइवेट मैसेजिंग एप्लिकेशन के जरिए उत्तरों के आदान-प्रदान में शामिल था।
प्रकरण तब सामने आया जब वेन्यू कमांडिंग ऑफिसर यशवीर, निवासी श्रीकोट, पुरोला, उत्तरकाशी ने दो दिसंबर को पुलिस में लिखित तहरीर दी। द्वितीय पाली की परीक्षा के दौरान 22 वर्षीय विवेक, पुत्र साधुराम, निवासी अचीना, चरखी दादरी (हरियाणा) की हरकतें संदिग्ध लगने पर उसकी तलाशी ली गई। तलाशी में उसके पास से एक नकल पर्ची बरामद हुई, जिसे वह जैकेट की आस्तीन में छिपाकर अंदर ले गया था। पुलिस ने उसे तत्काल गिरफ्तार कर लिया और विस्तृत पूछताछ शुरू की।
पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि परीक्षा में पास कराने के लिए उसकी हरियाणा में ‘शर्मा’ नामक एक व्यक्ति से चार लाख रुपये में डील हुई थी। शर्मा ने उसे परीक्षा से पहले परीक्षा केंद्र के आसपास तीन व्यक्तियों से मिलने के निर्देश दिए थे। आरोपी ने बताया कि उन व्यक्तियों ने उसके मोबाइल में एक विशेष एप डाउनलोड कराया, जिसके माध्यम से परीक्षा से संबंधित उत्तर भेजे जाते थे। इन उत्तरों को आरोपी ने पर्ची पर लिख लिया था और केंद्र में घुसने की कोशिश की, लेकिन चेकिंग के दौरान उसकी योजना विफल हो गई।
पुलिस की जांच में यह भी खुलासा हुआ कि पूरा गिरोह डिजिटल माध्यमों—विशेषकर प्राइवेट मैसेजिंग एप—के जरिए संचालित हो रहा था। यह समूह उम्मीदवारों को परीक्षा के दौरान उत्तर भेजने की पेशेवर व्यवस्था करता था, जिसके लिए बड़ी रकम वसूली जाती थी। पुलिस को आशंका है कि हरियाणा सहित कई अन्य राज्यों में भी इसी नेटवर्क के तार जुड़े हो सकते हैं।
वर्तमान में पुलिस आरोपी के मोबाइल, डाउनलोड किए गए एप और उनसे जुड़े सर्वर लिंक की तकनीकी जांच कर रही है। इसके अलावा परीक्षा केंद्र के बाहर जिन तीन लोगों से आरोपी की मुलाकात हुई थी, उनकी पहचान और संभावित भूमिकाओं की भी गहराई से पड़ताल की जा रही है। पुलिस सभी लिंकों को खंगालते हुए पूरे नेटवर्क पर कार्रवाई की दिशा में आगे बढ़ रही है, ताकि भविष्य में इस तरह की संगठित नकल की घटनाओं को रोका जा सके।




