
देहरादून: उत्तराखंड सरकार प्रदेश में खेल सुविधाओं को मजबूत करने और महिला खिलाड़ियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार कदम उठा रही है। इसी क्रम में धामी कैबिनेट ने लोहाघाट में स्थापित किए जा रहे महिला स्पोर्ट्स कॉलेज के संचालन के लिए 16 नए पदों के सृजन को मंजूरी दे दी है। सरकार का उद्देश्य कॉलेज को समय पर शुरू कर प्रदेश की उभरती महिला खेल प्रतिभाओं को आधुनिक प्रशिक्षण और बेहतर संसाधन उपलब्ध कराना है।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार राज्य सरकार कॉलेज के संचालन को लेकर तेजी से काम कर रही है। जुलाई माह से कॉलेज का संचालन शुरू करने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए स्पोर्ट्स कॉलेज पिथौरागढ़ के प्रधानाचार्य मनोज शर्मा को लोहाघाट स्थित नए महिला स्पोर्ट्स कॉलेज का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
सरकार ने कॉलेज की प्रशासनिक और खेल गतिविधियों को व्यवस्थित ढंग से संचालित करने के लिए विभिन्न महत्वपूर्ण पदों को स्वीकृति दी है। इन पदों के सृजन से कॉलेज के शैक्षणिक, प्रशिक्षण और खेल प्रबंधन संबंधी कार्यों को गति मिलेगी।
महिला स्पोर्ट्स कॉलेज में जिन 16 पदों को मंजूरी दी गई है, उनमें प्रधानाचार्य का एक पद शामिल है। इसके अलावा तीन खेल अध्यापक और तीन सहायक खेल अध्यापक नियुक्त किए जाएंगे। खिलाड़ियों के प्रशिक्षण और अनुशासन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए एक पीटीआई कम वार्डन तथा एक सहायक वार्डन का पद भी स्वीकृत किया गया है।
इसके अतिरिक्त कॉलेज में एक खेल प्रबंधक और एक फिजियोथेरेपिस्ट का पद भी सृजित किया गया है, ताकि खिलाड़ियों को पेशेवर प्रशिक्षण के साथ स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं भी मिल सकें। प्रशासनिक कार्यों के लिए एक कनिष्ठ सहायक, दो अनुसेवक और दो ग्राउंड स्टाफ के पद भी स्वीकृत किए गए हैं।
अधिकारियों के अनुसार कॉलेज में प्रवेश प्रक्रिया पहले से ही शुरू की जा चुकी है। सरकार का मानना है कि यह संस्थान भविष्य में प्रदेश की महिला खिलाड़ियों के लिए बड़ा मंच साबित होगा। यहां से प्रशिक्षित खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्तराखंड का नाम रोशन कर सकेंगी।
राज्य सरकार खेल क्षेत्र में आधारभूत संरचना विकसित करने पर विशेष जोर दे रही है। महिला स्पोर्ट्स कॉलेज की स्थापना को इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इससे सीमांत क्षेत्रों की प्रतिभाशाली छात्राओं को भी बेहतर खेल शिक्षा और प्रशिक्षण का अवसर मिलेगा, जो अब तक संसाधनों की कमी के कारण पीछे रह जाती थीं।




